1 साल 9 माह की अक्षिता ने बनाया रिकॉर्ड, 3 मिनट 24 सेकंड में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की पहचान

भारत के पड़ोसी देशों के नाम भी बताए, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ बैकुंठपुर की नन्हीं प्रतिभा का नाम
कोरिया-बैकुंठपुर ( शिखर दर्शन ) // छोटी उम्र में बच्चों की प्रतिभा अक्सर परिवार तक ही सीमित रहती है, लेकिन बैकुंठपुर की नन्हीं अक्षिता सिंह ने अपनी असाधारण स्मरणशक्ति और पहचान क्षमता से ऐसा कीर्तिमान बनाया है, जिसने पूरे कोरिया जिले को गौरवान्वित किया है। तलवापारा बैकुंठपुर निवासी अक्षिता सिंह ने महज 1 वर्ष 9 माह की उम्र में भारत के 28 राज्यों, 8 केंद्र शासित प्रदेशों और सभी पड़ोसी देशों की पहचान मात्र 3 मिनट 24 सेकंड में बताकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है।
खेल-खेल में सीखा राज्यों और देशों को पहचानना
अक्षिता के पिता निशांत सिंह और माता महिमा सिंह ने बताया कि वह शुरू से ही नई चीजों को जानने और पहचानने में विशेष रुचि दिखाती थी। परिवार ने उसकी रुचि को समझते हुए खेल-खेल में उसे भारत के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पड़ोसी देशों के बारे में जानकारी देना शुरू किया।
तस्वीरों, नक्शों और पहचान संबंधी अभ्यास के जरिए अक्षिता को लगातार सीखने का अवसर मिला। धीरे-धीरे उसकी स्मरणशक्ति और पहचानने की क्षमता इतनी विकसित हुई कि परिवार ने उसकी प्रतिभा को रिकॉर्ड के लिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
महज 3 मिनट 24 सेकंड में पूरा किया प्रदर्शन
निर्धारित प्रक्रिया के दौरान अक्षिता ने भारत के 28 राज्यों, 8 केंद्र शासित प्रदेशों और भारत के सभी पड़ोसी देशों की पहचान करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उसने पूरा प्रदर्शन महज 3 मिनट 24 सेकंड में पूरा किया।
जिस उम्र में अधिकांश बच्चे बोलने और आसपास की सामान्य चीजों को पहचानना सीख रहे होते हैं, उस उम्र में अक्षिता द्वारा इतनी बड़ी संख्या में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और देशों की पहचान करना उसकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है।
परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल
अक्षिता की उपलब्धि की जानकारी सामने आने के बाद परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में खुशी का माहौल है। लोगों ने नन्हीं अक्षिता और उसके माता-पिता को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
अक्षिता की इस उपलब्धि ने बैकुंठपुर के साथ पूरे कोरिया जिले का नाम गौरवान्वित किया है। उसके माता-पिता का कहना है कि बच्चों की रुचि को समझकर उन्हें सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाए तो वे छोटी उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
नन्हीं अक्षिता सिंह की यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि क्षेत्र के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का संदेश देती है।
