‘राहुल गांधी की मंशा देश में आग लगाने की’, SIR पर प्रदर्शनों को लेकर राजनाथ सिंह का तीखा हमला

रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर युवाओं को अराजकता की राजनीति में धकेलने का लगाया आरोप; राहुल गांधी को दी जनमत का सम्मान करने और टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की सलाह
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) //
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास कथित वोट चोरी के कोई सबूत नहीं हैं, इसके बावजूद प्रदर्शनों के जरिए युवाओं को अराजकता की राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है। राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव सुधार नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता पैदा कर सत्ता हासिल करना है। ये आरोप रक्षा मंत्री ने अपने राजनीतिक बयान के रूप में लगाए हैं।
‘विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके के बजाय अराजकता का रास्ता अपना रहा’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन के जरिए बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को गिराने और ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव की दिशा में मोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधार, SIR या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से आंदोलन कर रहा है।
‘राहुल गांधी को जनमत का सम्मान करना चाहिए’
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर टकराव की राजनीति करने के बजाय उन्हें जनमत का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के भविष्य की जिम्मेदारी सभी की है। ऐसे में राजनीतिक दलों को टकराव के बजाय संवाद और राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुनना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने अपने बयान में वकील प्रशांत भूषण और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा के बयानों का भी संदर्भ दिया। उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ जैसी शब्दावली विपक्ष के आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस पर गिनाए तीन कथित ‘अक्षम्य अपराध’
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए पार्टी पर तीन बड़े राजनीतिक आरोप लगाए।
- 1975 का आपातकाल: उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया और लोकतंत्र को दबाया।
- 1984 की सिख विरोधी हिंसा: रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
- 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी: उन्होंने उस समय कारसेवकों पर गोली चलाए जाने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया गया।
राजनाथ सिंह ने इन घटनाओं को कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास के गंभीर अध्याय बताते हुए पार्टी की मौजूदा लोकतंत्र संबंधी दलीलों पर सवाल उठाए।
SIR को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद लगातार तेज हो रहा है। विपक्ष SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि बीजेपी और उसके नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनाथ सिंह के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि SIR को लेकर जारी विवाद अब चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर स्थिति का आकलन करने के लिए संबंधित तथ्यों और दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।



