चार रियासतों के विलय से बना मध्य प्रदेश, भोपाल को राजधानी बनाने और ‘अमावस्या की रात’ में शपथ तक; तक की बेहद दिलचस्प कहानी

1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया था नया मध्य प्रदेश; 44 साल बाद छत्तीसगढ़ अलग हुआ, अब राज्य अपनी स्थापना के 71वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस केवल एक राज्य के गठन की तारीख नहीं, बल्कि देश की आजादी के बाद हुए बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक पुनर्गठन की याद भी है। 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए इस राज्य का निर्माण कई पूर्ववर्ती प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों को मिलाकर किया गया था। राजधानी के चयन से लेकर नए राज्य की सीमाएं तय करने तक, इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। बाद में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के साथ मध्य प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप एक बार फिर बदल गया।
चार प्रशासनिक इकाइयों को मिलाकर बना नया राज्य
आजादी के बाद देश में रियासतों के एकीकरण और प्रशासनिक पुनर्गठन का दौर चल रहा था। 1950 में संविधान लागू होने के समय मध्य भारत का यह भूभाग अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था। इनमें मध्य प्रदेश का तत्कालीन राज्य, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल प्रमुख थे। इनके अलावा राजस्थान के सिरोंज उपखंड को भी नए मध्य प्रदेश में शामिल किया गया।
तत्कालीन मध्य प्रदेश में महाकौशल और छत्तीसगढ़ सहित मध्य प्रांत के हिंदी भाषी क्षेत्र शामिल थे। मध्यभारत का गठन ग्वालियर और इंदौर सहित कई रियासतों को मिलाकर हुआ था, जबकि विंध्य प्रदेश में बुंदेलखंड और बघेलखंड की रियासतें शामिल थीं। भोपाल एक अलग रियासत थी, जिसका भारत संघ में विलय 1 जून 1949 को हुआ था।
राज्यों के भाषाई और प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए अक्टूबर 1953 में न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया गया। आयोग में के.एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू सदस्य थे। आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश के नए स्वरूप का रास्ता तैयार हुआ। पुराने मध्य प्रदेश के मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र को तत्कालीन बॉम्बे राज्य में शामिल किया गया, जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रों को मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल के साथ मिलाकर नया मध्य प्रदेश बनाया गया।
राजधानी के चयन में भोपाल ने मारी बाजी
नए राज्य के गठन के साथ राजधानी का चयन भी बड़ा सवाल था। ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहर इस दौड़ में चर्चा में थे। अंततः भोपाल को राजधानी बनाने का निर्णय हुआ। भोपाल पहले से ही एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था और वहां सरकारी कामकाज के लिए पर्याप्त भवन उपलब्ध थे। ऐतिहासिक मिंटो हॉल भी उन्हीं भवनों में शामिल था, जहां नए राज्य की सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ।
भोपाल के भारत संघ में विलय की कहानी भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। नवाब हमीदुल्लाह खान शुरू में भोपाल को स्वतंत्र इकाई बनाए रखने के पक्षधर थे। हालांकि, 30 अप्रैल 1949 को विलय समझौते पर हस्ताक्षर हुए और 1 जून 1949 को भोपाल का प्रशासन भारत सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद भोपाल भारतीय संघ का पार्ट-सी राज्य बना और 1956 में नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। India+1
1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया मध्य प्रदेश
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत 1 नवंबर 1956 को नया मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया। भोपाल के ऐतिहासिक मिंटो हॉल में 31 अक्टूबर की मध्यरात्रि को नई सरकार के गठन का समारोह आयोजित किया गया। पंडित रविशंकर शुक्ल ने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़ी अमावस्या की रात और हजारों दीपों का उल्लेख भी कई संस्मरणों में मिलता है।
नए राज्य की पहली विधानसभा की बैठक 17 दिसंबर 1956 को मिंटो हॉल में हुई। इस तरह अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों से मिलकर बने विशाल भूभाग ने एक नए राज्य के रूप में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा शुरू की।
44 साल बाद छत्तीसगढ़ बना अलग राज्य
मध्य प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप वर्ष 2000 में एक बार फिर बदल गया। लंबे समय से चली आ रही अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग के बाद संसद ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 पारित किया। इसके तहत 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस विभाजन के बाद मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों घट गए। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर बनी और बिलासपुर में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना हुई।
कृषि, उद्योग और स्वच्छता में नई पहचान
बीते सात दशकों में मध्य प्रदेश ने सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव देखे हैं। कभी पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिने जाने वाले इस प्रदेश ने कृषि उत्पादन, सिंचाई, सड़क संपर्क, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्रों में अपनी पहचान मजबूत की है। सोयाबीन, दलहन और शरबती गेहूं जैसे कृषि उत्पादों के लिए राज्य की अलग पहचान बनी है। कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रदेश को कई बार कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिल चुका है।
वहीं, इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के कारण मध्य प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में भी शामिल है।
1 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश अपने गठन के 70 वर्ष पूरे कर 71वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह अवसर राज्य की ऐतिहासिक यात्रा, उपलब्धियों और चुनौतियों को याद करने के साथ भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने का भी है।



