काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतरे पटवारी, वेतन विसंगति और पदोन्नति समेत तीन मांगों पर आर-पार की लड़ाई

13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, पीवी ऐप से गिरदावरी कराने पर जताई आपत्ति; मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी, धान खरीदी से पहले किसानों की चिंता बढ़ने की आशंका
बलौदाबाजार ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ में पटवारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। लंबित मांगों पर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए पटवारी संघ ने बुधवार को काले कपड़े पहनकर काला दिवस मनाया और विरोध प्रदर्शन किया। संघ वेतन विसंगति दूर करने, पदोन्नति देने तथा पीवी ऐप के स्थान पर भुइंया ऐप के माध्यम से गिरदावरी कराने की मांग कर रहा है। आंदोलनरत पटवारी रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं।
पटवारी संघ के सदस्य 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में धरना दे रहे पटवारियों ने काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया। पुरुष पटवारी काली शर्ट और टी-शर्ट में पहुंचे, जबकि महिला पटवारियों ने काली साड़ी और सूट पहनकर प्रदर्शन में भाग लिया। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें आंदोलन जारी रखना पड़ रहा है।
पीवी ऐप की खामियों पर सवाल, भुइंया ऐप से गिरदावरी कराने की मांग
पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष रसपाल सिंह ने पीवी ऐप की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें कई खामियां हैं। उनके मुताबिक, इन तकनीकी समस्याओं का असर गिरदावरी के काम पर पड़ सकता है और आगे चलकर किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण संघ इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है।
रसपाल सिंह का कहना है कि पटवारियों ने ऐप से जुड़ी समस्याओं और अपनी आपत्तियों से शासन को अवगत कराया था, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ। संघ की मांग है कि शासन पटवारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर पीवी ऐप की खामियां दूर करे अथवा गिरदावरी का काम भुइंया ऐप के माध्यम से ही कराया जाए।
उन्होंने वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग भी दोहराई। सिंह ने आशंका जताई कि यदि समय रहते समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो धान खरीदी के दौरान किसानों को दिक्कतें हो सकती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तहसीलदार स्तर के अधिकारी पटवारियों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।
किसान और शासन के बीच अहम कड़ी हैं पटवारी : संघ
संघ की प्रवक्ता रश्मि उपाध्याय ने कहा कि काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने का उद्देश्य अपनी मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने 15 नवंबर से प्रस्तावित धान खरीदी का उल्लेख करते हुए कहा कि गिरदावरी का काम प्रभावित होने पर किसानों के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
रश्मि उपाध्याय के अनुसार, पटवारी किसान और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए उनकी मांगों को केवल कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। संघ का कहना है कि गिरदावरी की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं का असर किसानों के कामकाज पर भी पड़ सकता है। ऐसे में शासन को समय रहते बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।
कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने भी आंदोलन को दिया समर्थन
पटवारियों के आंदोलन को कनिष्ठ प्रशासनिक संघ का समर्थन भी मिला है। बीते दिनों संघ के प्रांताध्यक्ष पेखन टोण्डे अपने साथियों के साथ बलौदाबाजार के दशहरा मैदान स्थित धरना स्थल पहुंचे थे। उन्होंने पटवारियों की मांगों को उचित बताते हुए आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
फिलहाल पटवारी संघ अपनी मांगों पर कायम है। काला दिवस मनाने के बाद अब रैली और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन के जरिए शासन तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन आंदोलनरत पटवारियों से बातचीत शुरू कर उनकी मांगों के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है।



