मध्यप्रदेश

महाकाल मंदिर की सुरक्षा के लिए आधी रात को उतरे 100 से ज्यादा NSG कमांडो, आतंकियों से निपटने का किया अभ्यास

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और किसी भी संभावित आतंकी खतरे से निपटने की तैयारी के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में देर रात विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसमें 100 से अधिक NSG कमांडो के साथ स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन की टीमों ने हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान डमी आतंकियों से निपटने और बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई का अभ्यास किया गया।

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के कमांडो ने विशेष मॉक ड्रिल की। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों को परखना और आपात स्थिति में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना था।

महाकाल महालोक से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम तक चला अभ्यास

यह मॉक ड्रिल महाकाल महालोक के मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के बीच आयोजित की गई। रात करीब 11 बजे शुरू हुआ अभ्यास शुक्रवार तड़के 2 बजे तक चला। इस दौरान अलग-अलग संभावित सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया, कार्रवाई की गति और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल का आकलन किया गया।

डमी आतंकियों और बंधकों को लेकर बनाई गई रणनीति

अभ्यास के दौरान डमी आतंकियों से निपटने और डमी बंधकों को सुरक्षित रेस्क्यू करने की कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य यह परखना था कि किसी अप्रत्याशित घटना के दौरान सुरक्षा एजेंसियां किस तरह तेजी से मोर्चा संभालती हैं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस प्रकार समन्वित कार्रवाई करती हैं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से NSG कमांडो, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने संयुक्त रूप से यह अभ्यास किया।

उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल के जरिए संभावित सुरक्षा खतरों का आकलन किया जाता है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियां किस तरह मिलकर काम करेंगी। इस प्रक्रिया से सुरक्षा व्यवस्था की संभावित कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में मदद मिलती है।

आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने पर जोर

इस तरह के अभ्यास से सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होता है और संकट के समय त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता को परखा जा सकता है। महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा तैयारियों का नियमित आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित खतरे या आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियां तत्परता से कार्रवाई कर सकें और मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिस्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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