सेमीकंडक्टर से मछली निर्यात तक, मध्य प्रदेश में आज तीन बड़े मुद्दों पर हलचल; भोपाल मास्टर प्लान के खिलाफ किसान लामबंद

मध्य प्रदेश में आज उद्योग, निवेश और भूमि उपयोग से जुड़े तीन अहम घटनाक्रम चर्चा में हैं। इंदौर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर मंथन होगा, जबकि भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के विरोध में किसान संगठन प्रदर्शन की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, भोपाल में मत्स्य पालन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
भोपाल ( शिखर दर्शन ) //
इंदौर में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने पर मंथन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर में आयोजित एमपी सेमीकंडक्टर समिट-2026 में शामिल होंगे। सम्मेलन में प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं और भावी रणनीति पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का लगभग 50 कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें करने का कार्यक्रम है। चिप डिजाइन, विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े बुनियादी ढांचे पर केंद्रित आठ पैनल चर्चाएं और पांच गोलमेज बैठकें प्रस्तावित हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के विषय पर आईआईटी और आईआईएम के निदेशकों के साथ भी चर्चा की जाएगी। प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति-2025 के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में 50 से अधिक कंपनियों की ओर से तकनीक और चिप से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के खिलाफ किसान संगठन का प्रदर्शन
भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 को लेकर विरोध तेज हो गया है। कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव और बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों पर किसानों ने आपत्ति जताई है।
भारतीय किसान संघ ने इसी मुद्दे पर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएनसीपी) के कार्यालय का घेराव करने की घोषणा की है। इससे पहले 66 गांवों के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों को नीलबड़ चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था।
किसानों की प्रमुख चिंता यह है कि प्रस्तावित योजना के तहत भूमि उपयोग में बदलाव से उनकी जमीनों पर असर पड़ सकता है। वहीं, बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण से संबंधित प्रावधान भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। किसान संगठन इन मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए योजना में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
मत्स्य पालन और निर्यात में निवेश बढ़ाने की तैयारी
मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन को बड़े कारोबारी क्षेत्र के रूप में विकसित करने और मछली उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में ‘फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव’ आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल के शामिल होने का कार्यक्रम है। सम्मेलन में निवेश, मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।
आयोजन के दौरान कुवैत की एक कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाने की जानकारी दी गई है। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक, सम्मेलन के माध्यम से करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आकर्षित करने और लगभग 3.5 लाख रोजगार के अवसरों की संभावनाएं तलाशने का लक्ष्य है।
सम्मेलन में बायर-सेलर बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें निर्यातकों और कारोबारियों को स्थानीय मत्स्य उत्पादकों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इसके अलावा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से संबंधित लाभ वितरित किए जाने की भी योजना है।
उद्योग, खेती और रोजगार पर टिकी नजरें
सेमीकंडक्टर समिट से तकनीकी निवेश और कौशल विकास, मास्टर प्लान के विरोध से किसानों की भूमि संबंधी चिंताएं तथा मत्स्य सम्मेलन से रोजगार और निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं जुड़ी हैं। इन तीनों आयोजनों के फैसलों और परिणामों पर प्रदेश के उद्योग जगत, किसान संगठनों और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।



