बिलासपुर संभाग

सजा के 22 दिन बाद भी स्कूल में पढ़ा रहा दोषी शिक्षक, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में न्यायालय ने सुनाई सजा, बेलमुंडी स्कूल में अब भी दे रहा सेवाएं; डीईओ बोले—जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई

न्यायालय से दोषसिद्धि और सजा का आदेश जारी होने के 22 दिन बाद भी संबंधित शिक्षक का स्कूल में कार्यरत रहना शिक्षा विभाग की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में सजा पाने वाले शिक्षक के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं होने पर विभाग की भूमिका चर्चा में है।

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी ठहराए गए शासकीय शिक्षक विवेक गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता की दो धाराओं के तहत शिक्षक को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इसके बावजूद वह बेलमुंडी स्कूल में सेवाएं दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं होने की बात कही है। उन्होंने न्यायालय के आदेश की जानकारी लेकर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की बात कही है।

मामला केवल एक शिक्षक की दोषसिद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। यदि आदेश की जानकारी विभाग तक नहीं पहुंची, तो यह सवाल भी उठता है कि न्यायालय के फैसले के बाद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कराने की जिम्मेदारी किसकी थी।

छेड़छाड़ के मामले में एक साल का सश्रम कारावास

बिलासपुर जिले में तखतपुर की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने शिक्षक विवेक गुप्ता, निवासी अर्चना विहार, नेहरू नगर, को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 323 के तहत एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक धारा के तहत एक-एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने का प्रावधान आदेश में बताया गया है।

न्यायालय ने मामले में उपलब्ध गवाही, अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए।

2018 में स्कूल परिसर में हुई थी घटना

अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को सुबह करीब 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। उस समय वहां पदस्थ महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनका हाथ पकड़कर खींचा और अश्लिल हरकत की थी। आरोप के मुताबिक उनके चरित्र पर लांछन लगाते हुए गाली-गलौज भी की गई थी।

शिक्षिका के विरोध करने पर मारपीट कर उन्हें दीवार की ओर धकेल दिया गया था , जिससे उनके चेहरे और सिर में चोटें आईं थी।

दोषसिद्धि के बाद विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल

न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद भी शिक्षक का स्कूल में कार्यरत रहना प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन गया है। सरकारी सेवा में किसी कर्मचारी की आपराधिक मामले में दोषसिद्धि होने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी को न्यायालय के आदेश, अपराध की प्रकृति और लागू सेवा नियमों के आधार पर निर्णय लेना होता है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित शिक्षक के मामले में विभाग को आदेश की जानकारी कब मिली, अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्या दोषसिद्धि के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक परीक्षण शुरू किया गया है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिक्षक की सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी को स्वतः अनिवार्य मानना उचित नहीं होगा। हालांकि न्यायालय से सजा मिलने के बाद विभाग द्वारा मामले की जानकारी लेकर नियमों के अनुरूप समयबद्ध निर्णय लेना जरूरी है।

डीईओ का बयान—जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई

जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि उन्हें संबंधित शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं है। न्यायालय का आदेश विभाग तक नहीं पहुंचने के संबंध में जानकारी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले को संज्ञान में लेकर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

अब विभाग की कार्रवाई पर नजर

न्यायालय के फैसले के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि संबंधित शिक्षक के विरुद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया कब शुरू होगी। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग न्यायालय के आदेश का परीक्षण कर कितनी शीघ्रता से नियमानुसार निर्णय लेता है। मामला महिला शिक्षिका से जुड़े गंभीर अपराध में दोषसिद्धि और सरकारी सेवा में जवाबदेही से संबंधित है, इसलिए विभाग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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