मां-बेटी हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी, चौथे को मरते दम तक उम्रकैद; अदालत के फैसले से मचा हड़कंप

सूरजपुर ( शिखर दर्शन ) // 13 अक्टूबर 2024 की वह भयावह रात, जिसने पूरे सूरजपुर को झकझोर कर रख दिया था, अब न्यायिक फैसले के एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गई है। प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या तथा दुष्कर्म से जुड़े इस चर्चित मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी और चौथे को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। करीब दो साल चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले को मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
कुलदीप साहू समेत तीन को फांसी, चौथे को आजीवन कारावास
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू और चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा दी गई है।
इससे पहले 29 सितंबर 2026 को अदालत ने चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी।
13 अक्टूबर की रात हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। प्रधान आरक्षक ड्यूटी पर थे और उनका परिवार शहर स्थित किराए के मकान में था। इसी दौरान पुलिस और मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के बीच विवाद हुआ था।
अभियोजन के मुताबिक, पुलिस से बचने की कोशिश के दौरान आरोपी ने एक आरक्षक पर खौलता हुआ तेल फेंका। इसके बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई। इसी घटनाक्रम के बीच प्रधान आरक्षक के घर में मां-बेटी को निशाना बनाए जाने का आरोप है।
घर में मौजूद महिला के साथ दुष्कर्म किया गया और धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद उसकी 11 वर्षीय बेटी की भी हत्या कर दी गई। दोनों शवों को घर से दूर सुनसान स्थान पर ले जाकर फेंक दिया गया था।
ड्यूटी से लौटे प्रधान आरक्षक ने देखा खौफनाक मंजर
ड्यूटी खत्म होने के बाद जब प्रधान आरक्षक घर पहुंचे तो दरवाजा टूटा हुआ था। घर के भीतर सामान बिखरा पड़ा था और खून के निशान दिखाई दे रहे थे। पत्नी और बेटी दोनों घर से गायब थीं।
रातभर तलाश के बाद अगले दिन दोनों के शव बरामद किए गए। इसके बाद मामला हत्या, दुष्कर्म और नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराधों की जांच में बदल गया।
पुलिस से पुराना विवाद भी बना अहम कड़ी
जांच के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस से उसके पुराने विवाद की जानकारी भी सामने आई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उसे निगरानीशुदा बदमाश के तौर पर भी देखा जाता था।
2024 में गिरफ्तारी के समय उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों का उल्लेख पुलिस की ओर से किया गया था। उसे पहले जिला बदर भी किया जा चुका था। इस पृष्ठभूमि को भी जांच में महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।
पुलिस पर वाहन चढ़ाने के मामले में 10 साल की सजा
इसी घटनाक्रम से जुड़े एक अलग मामले में अदालत ने कुलदीप साहू को पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
वहीं पुलिस टीम पर कथित फायरिंग से जुड़े अलग मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी को इस आरोप से दोषमुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
हत्याकांड के बाद सड़कों पर उतर आया था आक्रोश
मां-बेटी की हत्या की खबर सामने आने के बाद सूरजपुर में भारी जनाक्रोश फैल गया था। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
हालात इतने बिगड़ गए थे कि आरोपी के घर और उससे जुड़े वाहनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई थीं। कानून-व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल बढ़ाना पड़ा था। इस घटना ने पूरे प्रदेश में अपराध और पुलिसिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
फरार हुआ था मुख्य आरोपी, बाद में पकड़ा गया
वारदात के बाद मुख्य आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश में आसपास के जिलों और संभावित ठिकानों पर दबिश दी। बाद में उसे बलरामपुर जिले में बस से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और अंततः चार आरोपियों के खिलाफ मुख्य हत्याकांड का मुकदमा चला।
करीब दो साल चली सुनवाई के बाद आया फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई करीब दो साल तक चली। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। 29 सितंबर को अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।
इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी विरलतम श्रेणी का अपराध बताते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की गई थी।
8 अक्टूबर को अदालत ने तीन दोषियों को फांसी और चौथे दोषी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई।
दोषी ठहराए जाने के बाद कुलदीप के व्यवहार की भी हुई चर्चा
29 सितंबर को दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत परिसर से बाहर निकलते समय कुलदीप साहू के मुस्कुराने का वीडियो भी सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक उसने मीडिया से अपनी मुस्कुराती हुई तस्वीर लेने की बात कही थी।
यह वीडियो उस समय चर्चा का विषय बना था। हालांकि, यह व्यवहार अदालत के फैसले का आधार नहीं था।
मौत की सजा पर अभी बाकी है आगे की न्यायिक प्रक्रिया
फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मौत की सजा को लागू करने से पहले उच्च न्यायालय की न्यायिक पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी है।
इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला मामले में बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन फांसी की सजा के अंतिम क्रियान्वयन से पहले आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
फैसले का सार
कुलदीप साहू — फांसी
फूल सिंह उर्फ रिंकू — फांसी
चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके — फांसी
आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी — मरते दम तक उम्रकैद
करीब दो साल पहले जिस घटना ने सूरजपुर को आक्रोश और सदमे में डाल दिया था, उसमें अब ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। हालांकि मौत की सजा के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी बाकी है, लेकिन अदालत का यह फैसला इस बहुचर्चित हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव जरूर है।


