खेल

गांव की मिट्टी से एशियन गेम्स के पोडियम तक, संजू देवी और अनिमेष ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

संजू ने कबड्डी में जीता स्वर्ण, अनिमेष की रिले टीम ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ हासिल किया कांस्य; दोनों की संघर्षभरी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा

एशियन गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कोरबा की संजू देवी भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी हैं, वहीं जशपुर के अनिमेष कुजूर ने मिश्रित 4×100 मीटर रिले में कांस्य पदक जीतने के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाली भारतीय चौकड़ी का हिस्सा बनकर इतिहास रचा। भारतीय टीम ने 41.06 सेकंड में रेस पूरी की और 41.35 सेकंड के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

रायपुर ( शिखर दर्शन ) //

गांव से कबड्डी के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं संजू

कोरबा जिले के केरा कछार की रहने वाली संजू देवी का खेल सफर सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ। गांव में कबड्डी का माहौल और खेल के प्रति बढ़ती रुचि ने उन्हें इस खेल की ओर खींचा। शुरुआती दौर में कबड्डी को लेकर गंभीरता कम थी, लेकिन 12वीं के बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ खेल पर भी पूरी तरह ध्यान देना शुरू किया।

परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद माता-पिता ने उनके खेल को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। संजू ने कोरबा जिला कबड्डी संघ से प्रशिक्षण लिया और आगे बेहतर सुविधाओं के साथ अपनी तैयारी जारी रखी।

चोट के बाद वापसी ने मजबूत किया हौसला

संजू के खेल करियर में चोट भी बड़ी चुनौती बनकर आई। एक प्रतियोगिता के दौरान चोट लगने के बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। इसके बाद फिजियोथेरेपी, डाइट और फिटनेस पर लगातार काम करते हुए उन्होंने मैदान पर वापसी की।

भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर में उन्हें बेहतर कोचिंग, पोषण और फिटनेस सुविधाओं के साथ तैयारी का अवसर मिला। इसके बाद उनके प्रदर्शन में लगातार निखार आया और वह भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा बनीं।

एशियन गेम्स के स्वर्ण से जुड़ी बड़ी उपलब्धि

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया। टीम की सदस्य के तौर पर संजू देवी की यह उपलब्धि उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संजू देवी से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और राज्य सरकार की ओर से 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

जशपुर से निकले अनिमेष ने ट्रैक पर रचा इतिहास

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के घुइतांगर गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स तक पहुंचे अनिमेष कुजूर ने मिश्रित 4×100 मीटर रिले में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली टीम का हिस्सा बनकर बड़ी उपलब्धि हासिल की।

भारतीय चौकड़ी में गुरिंदरवीर सिंह, स्नेहा शनुवाली, अनिमेष कुजूर और हरिता भद्रा शामिल थे। टीम ने 41.06 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस प्रदर्शन के साथ भारत ने अपना पिछला 41.35 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बेहतर कर दिया। चीन ने स्वर्ण और थाईलैंड ने रजत पदक जीता।

फुटबॉल से शुरू हुआ सफर, स्प्रिंटिंग में बनाई पहचान

अनिमेष का खेल सफर सीधे एथलेटिक्स से शुरू नहीं हुआ था। शुरुआती दौर में वह फुटबॉल खेलते थे। बाद में दौड़ प्रतियोगिताओं में उनकी रफ्तार ने लोगों का ध्यान खींचा और उन्होंने स्प्रिंटिंग को गंभीरता से अपना लिया।

जशपुर के गांव से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और बाद में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के जरिए अपने प्रदर्शन को और निखारा। 2025 में 200 मीटर में 20.32 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने की उपलब्धि भी उनके खाते में दर्ज है।

बारिश और दबाव के बीच भी नहीं टूटी रफ्तार

एशियन गेम्स के दौरान बारिश से ट्रैक प्रभावित रहा। इसके बावजूद भारतीय चौकड़ी ने दबाव के बीच अपना प्रदर्शन कायम रखा और फाइनल में 41.06 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।

अनिमेष के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 100 और 200 मीटर में प्रतिस्पर्धा के बाद रिले में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ पदक उनके अभियान की बड़ी उपलब्धि बन गया।

दो पदक, दो संघर्ष और एक बड़ी प्रेरणा

संजू देवी और अनिमेष कुजूर की कहानियां अलग-अलग खेलों से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों की शुरुआत बड़े शहरों या महंगे प्रशिक्षण केंद्रों से नहीं हुई। एक ने कोरबा से कबड्डी के मैट तक का सफर तय किया, तो दूसरे ने जशपुर के गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर अपनी पहचान बनाई।

एशियन गेम्स में इन दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां छत्तीसगढ़ की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा हैं। इन सफलताओं के साथ अब गांव और छोटे शहरों से निकलने वाले खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और लगातार अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!