भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार से सजे महाकाल, भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ अलंकरण

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर भगवान महाकालेश्वर की भस्म आरती विधि-विधान से संपन्न हुई। मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर भांग, चंदन और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया। भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक-पूजन के बाद भगवान का भांग, चंदन और आभूषणों से श्रृंगार किया गया।
मंत्रोच्चार के बीच अर्पित की गई भस्म
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान महाकालेश्वर को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से भगवान का मनोहारी अलंकरण किया गया।
भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। शनिवार को भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर आशीर्वाद मांगा। इस दौरान मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।



