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आज तीन पावन पर्वों का महासंयोग: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी के साथ हिंदू नववर्ष का शुभारंभ

रायपुर / नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर आज पूरे देश में नववर्ष का उल्लास छाया हुआ है। उत्तर भारत में जहां इस दिन से भारतीय नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है, वहीं दक्षिण भारत में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ भी होता है, जबकि महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में नवसंवत्सर का स्वागत किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे ‘युगादि’ यानी युग की शुरुआत भी कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति के नव श्रृंगार, नई ऊर्जा और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और तिथि का महत्व
पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होकर 20 मार्च को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर यह पर्व 19 मार्च को ही मनाया जा रहा है।
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 11 मिनट तक निर्धारित किया गया है।

उगादी: दक्षिण भारत में नववर्ष का उत्सव
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों को सजाते हैं, विशेष व्यंजन बनाते हैं और पंचांग श्रवण की परंपरा निभाते हैं। उगादी जीवन में सुख-दुख को समान भाव से स्वीकार करने का संदेश भी देता है।

गुड़ी पड़वा पर गुड़ी बांधने का शुभ समय
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा को हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों के बाहर गुड़ी (ध्वज) बांधकर विजय और समृद्धि का प्रतीक स्थापित किया जाता है।
गुड़ी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस अवसर पर लोग अपने घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं और पारंपरिक पकवान तैयार कर नए वर्ष का स्वागत करते हैं।

यह पावन दिन नई शुरुआत, सकारात्मकता और समृद्धि का संदेश देता है, जिसके साथ लोग अपने जीवन में सुख-शांति और उन्नति की कामना करते हैं।

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