छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड 12 नवंबर तक बढ़ी, ईडी ने बताई 16.70 करोड़ की अवैध कमाई
रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड अवधि को अदालत ने 12 नवंबर तक बढ़ा दिया है। बुधवार को उनकी रिमांड अवधि समाप्त होने पर उन्हें विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित निवास से गिरफ्तार किया था। उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
प्रारंभिक जांच में ईडी ने पाया कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) विभिन्न लाभार्थियों की जेब में गई।
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद प्राप्त हुए, जिनका उपयोग उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों में किया। इस रकम से प्रोजेक्ट ठेकेदारों को नकद भुगतान, बैंकिंग प्रविष्टियां और अन्य माध्यमों से लेन-देन किए गए।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि चैतन्य बघेल ने कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलीभगत कर अपनी कंपनी के “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद के नाम पर ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम से 5 करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किए। ईडी के अनुसार, बैंकिंग ट्रेल से यह स्पष्ट होता है कि लेन-देन की अवधि में ढिल्लों के खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान आया था।
इस घोटाले में अब तक कई बड़े नाम ईडी की गिरफ्त में आ चुके हैं, जिनमें पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा शामिल हैं।
फिलहाल, ईडी इस घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की गहन जांच में जुटी हुई है।
