सार्वजनिक मार्ग और बिजली तारों के नीचे पंडाल लगाने पर प्रतिबंध, शासन ने पेश की नई पॉलिसी , हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई
रायपुर/बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल व अस्थायी संरचनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ के समक्ष शासन ने नई पॉलिसी पेश की, जिसके तहत अब कोई भी व्यक्ति, समिति या संगठन बिना अनुमति के सार्वजनिक मैदान, मार्ग, फुटपाथ या चौराहों पर पंडाल, अस्थायी संरचना, धरना, जुलूस, सभा या रैली नहीं कर सकेगा। यह पॉलिसी 25 अगस्त 2025 को जारी की गई है।
याचिकाकर्ता रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि नई पॉलिसी में बिना अनुमति आयोजन करने पर सजा का भी प्रावधान है। शासन ने इसके लिए दो स्तर के दिशा-निर्देश तय किए हैं।
पांच हजार वर्ग फीट से छोटे पंडाल व आयोजन के लिए शर्तें
- अनुमति नगर पालिक निगम व स्थानीय निकाय देंगे।
- मुख्य मार्गों पर पंडाल की अनुमति नहीं होगी, यदि दी जाती है तो वैकल्पिक मार्ग तय करना होगा।
- किसी भी पंडाल का निर्माण विद्युत तारों के नीचे नहीं होगा।
- पंडाल अग्निरोधी सामग्री से बने होंगे।
- आयोजक समिति को साफ-सफाई की जिम्मेदारी लेनी होगी।
पांच हजार वर्ग फीट से बड़े पंडाल व आयोजन के लिए शर्तें
- आवेदन के साथ एडीएम, थाना प्रभारी, अग्निशमन और बिजली विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा।
- अनुमति शुल्क जमा करना होगा।
- जनरेटर बैकअप की व्यवस्था जरूरी होगी।
- पंडाल व संरचना अन्य भवनों से कम से कम 15 फीट दूरी पर होना चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि आगामी गणेश विसर्जन के दौरान इस नई पॉलिसी का परीक्षण किया जा सकता है। वहीं शासन की ओर से दुर्गा पूजा के बाद प्रकरण की अगली सुनवाई रखने का निवेदन किया गया। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की है।



