दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी पर बिना सबूत के आरोप लगाने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट की ईडी पर तल्ख टिप्पणी: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बिना सबूत के आरोप लगाने का पैटर्न बन गया है
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस. ओका ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आरोपी अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार, 5 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए तल्ख टिप्पणी की।

जस्टिस अभय एस. ओका ने सुनवाई के दौरान कहा कि, “ईडी बिना सबूत के आरोप लगाता है, यह अब एक पैटर्न बन चुका है।” उन्होंने यह सवाल तब उठाया जब ईडी के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने आरोपी अरविंद सिंह के खिलाफ सबूत पेश करने के लिए समय मांगा।

ईडी ने अरविंद सिंह पर 40 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप लगाया है, लेकिन कोर्ट ने पाया कि अभी तक आरोपी का किसी संबंधित कंपनी से संबंध साबित नहीं किया गया है। जस्टिस ओका ने ईडी से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उनके पास कोई ठोस सबूत है या केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

यह घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच का है, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य की सरकारी शराब दुकानों से अवैध तरीके से शराब बेचने का आरोप है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि इस गड़बड़ी से सरकार को करीब 2,161 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के शासनकाल में कई उच्च अधिकारियों और नेताओं पर आरोप लगे हैं। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ए.पी. त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर, और अन्य नेताओं व मंत्रियों का एक संगठित सिंडिकेट इस घोटाले में शामिल था।

ईडी ने 28 दिसंबर 2024 को कवासी लखमा और उनके परिवार के घरों पर छापेमारी की थी, जिसमें कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी का दावा है कि इनसे अपराध से अर्जित आय के पुख्ता सबूत मिले हैं।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश: केवल आरोप नहीं, सबूत जरूरी

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया और ईडी को सबूत पेश करने के लिए समय दिया। जस्टिस ओका ने दो टूक कहा कि, “हमने कई मामलों में यही देखा है कि ईडी केवल आरोप लगाता है, परंतु सबूत नहीं देता। यह तरीका स्वीकार्य नहीं है।”

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