वक्फ विधेयक पर राज्यसभा में हंगामा: विपक्ष ने रिपोर्ट से हिस्से हटाने का लगाया आरोप, मंत्री रिजिजू ने बताया बेबुनियाद

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // संसद के बजट सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट भारी हंगामे के बीच पेश की गई। विपक्षी दलों ने रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को बिना अनुमति हटाने का आरोप लगाया, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन में कई बार बाधा उत्पन्न हुई।
जेपीसी रिपोर्ट पर विपक्ष का विरोध, कांग्रेस सांसद बोले- असहमति नोट में छेड़छाड़
कर्नाटक से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि उनके असहमति नोट के कुछ अंश बिना सूचना हटाए गए हैं। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जेपीसी को जानबूझकर “तमाशा” बना दिया गया है। विपक्ष ने रिपोर्ट को असंवैधानिक करार देते हुए इसे दोबारा जेपीसी को भेजने की मांग की।
सरकार का पलटवार, रिजिजू बोले- रिपोर्ट में कुछ नहीं बदला
विपक्ष के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि रिपोर्ट नियमों के तहत तैयार की गई है और किसी भी हिस्से को डिलीट नहीं किया गया। उन्होंने विपक्ष पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से संबंधित है, जो उनके ही पास है।
जेपी नड्डा का आरोप- विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा
भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनका उद्देश्य चर्चा करना नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदा उठाना है। उन्होंने विपक्षी दलों पर देश को बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि जेपीसी के अध्यक्ष को रिपोर्ट से कुछ भी हटाने का अधिकार होता है।
AAP सांसद संजय सिंह ने उठाया सवाल
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने जेपीसी रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर असहमति नोट से कोई सहमत नहीं है, तो उसे कूड़ेदान में डालने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि अगर आज वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा हो रहा है, तो कल यही गुरुद्वारों और मंदिरों के साथ भी हो सकता है।
खड़गे ने बताया असंवैधानिक, रिपोर्ट को जेपीसी के पास भेजने की मांग
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपीसी रिपोर्ट को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया कि सदस्यों के असहमति नोट्स को जानबूझकर हटाया गया। उन्होंने कहा कि जेपीसी को दोबारा रिपोर्ट तैयार कर पेश करनी चाहिए और विपक्ष की चिंताओं को शामिल करना चाहिए।
राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने जहां रिपोर्ट को दोबारा समीक्षा के लिए भेजने की मांग की, वहीं सरकार ने इसे नियमों के तहत पूरी तरह वैध बताते हुए खारिज कर दिया।
