शेयर बाजार में गिरावट का बड़ा असर, 9 महीने में 8 कंपनियों की आधी से ज्यादा वैल्यू घटी; 132 शेयर 25% टूटे

मुंबई ( शिखर दर्शन ) // वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार की कमजोरी का असर केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा। मिड और लार्ज-कैप कंपनियों के शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक बाजार पूंजीकरण वाली 920 कंपनियों में से 466 कंपनियों, यानी करीब 51 प्रतिशत, का इस साल अब तक रिटर्न शून्य या नकारात्मक रहा है।
मुंबई ( शिखर दर्शन ) //
8 कंपनियों की आधी से ज्यादा बाजार वैल्यू घटी
गिरावट की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2026 के शुरुआती 9 महीनों में 8 कंपनियों ने अपनी बाजार पूंजी का 50 प्रतिशत से ज्यादा गंवा दिया। इनमें राजेश एक्सपोर्ट्स, KPIT टेक्नोलॉजीज, यूग्रो कैपिटल, GRM ओवरसीज, CE Info Systems, फिनो पेमेंट्स बैंक, रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और KEC इंटरनेशनल शामिल हैं।
इन कंपनियों का मौजूदा मूल्यांकन पिछले पांच वर्षों के ऐतिहासिक औसत से भी नीचे बताया जा रहा है। विश्लेषण में उन्हीं कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनके पिछले पांच साल के मूल्यांकन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध हैं।
132 शेयर 25 प्रतिशत या उससे ज्यादा टूटे
बाजार में व्यापक कमजोरी का एक और संकेत यह है कि 132 कंपनियों के शेयर इस साल की शुरुआत से 25 प्रतिशत या उससे ज्यादा गिर चुके हैं। यानी बाजार में सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों के एक बड़े हिस्से पर दबाव देखने को मिला है।
इससे संकेत मिलता है कि 2026 में बाजार की कमजोरी का असर केवल बेंचमार्क सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़ी संख्या में व्यक्तिगत शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
कंपनियों की अपनी परेशानियों ने बढ़ाई मुश्किल
बाजार की सामान्य कमजोरी के अलावा कई कंपनियों की आंतरिक चुनौतियों ने भी शेयरों पर दबाव बढ़ाया। राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर्स पर नियामकीय कार्रवाई के तहत प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंध लगाया गया, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।
फिनो पेमेंट्स बैंक के शेयरों पर कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का दबाव रहा। वहीं, यूग्रो कैपिटल को बढ़ती फंडिंग लागत और परिचालन खर्च की चुनौती का सामना करना पड़ा।
KPIT टेक्नोलॉजीज के सामने प्रमुख ग्राहकों की ओर से परियोजनाओं में देरी और तकनीकी बजट में कटौती की चुनौती रही। CE Info Systems के मुनाफे के मार्जिन पर एक प्रमुख ग्राहक से मिलने वाली राशि को राइट-ऑफ करने का असर पड़ा। GRM ओवरसीज को बढ़ती इनपुट लागत के कारण मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ा।
रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और KEC इंटरनेशनल पर भी ऊंची इनपुट लागत तथा परियोजनाओं को पूरा करने में आ रही चुनौतियों का असर पड़ा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी दबाव
बाजार की कमजोरी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले नौ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 3.05 लाख करोड़ रुपये की निकासी की।
यह आंकड़ा पिछले पूरे साल की करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली से भी अधिक है। यानी विदेशी निवेशकों ने केवल नौ महीनों में पिछले पूरे वर्ष की तुलना में ज्यादा पैसा भारतीय शेयर बाजार से निकाल लिया।
क्रूड और वैश्विक तनाव भी बने दबाव की वजह
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी भारतीय बाजार को प्रभावित किया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में बदलाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, 2026 में अब तक शेयर बाजार की कमजोरी कई स्तरों पर दिखाई दी है। जहां बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, वहीं कुछ कंपनियों को बाजार की सामान्य परिस्थितियों के साथ-साथ अपनी कारोबारी और नियामकीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है।