पूर्व DGP एसपी वैद ने BJP नेतृत्व से पूछा- क्या 2014 में इसी दिन के लिए सत्ता सौंपी थी ? UGC और SC-ST Act पर उठाए सवाल
प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व को टैग कर जारी किया वीडियो संदेश; कहा- देश को बांटने नहीं, आगे ले जाने वाले कानून बनें

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) //
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एसपी वैद ने देश के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व से कई सवाल किए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को टैग करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया और कहा कि 2014 में जिस उम्मीद के साथ लोगों ने भाजपा को सत्ता सौंपी थी, उस पर सरकार और पार्टी नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
एसपी वैद ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें भाजपा नेतृत्व से सीधे मुखातिब होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने 2014 के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के लोगों को आज भी भाजपा और केंद्र सरकार से काफी उम्मीदें हैं।
UGC गाइडलाइंस और SC-ST Act को लेकर सवाल
पूर्व DGP ने अपने संदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की गाइडलाइंस और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने सवाल किया कि क्या लोगों ने 2014 में भाजपा को सत्ता में इसलिए लाया था कि ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो। वैद ने केंद्र सरकार से ऐसे कदम उठाने की अपील की, जिनसे देश के सभी वर्गों के हित सुरक्षित हों और सामाजिक ताना-बाना मजबूत हो।
‘भाजपा को दो नावों पर नहीं चलना चाहिए’
एसपी वैद ने कहा कि देश के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार से अभी भी उम्मीदें हैं। उन्होंने भाजपा की विचारधारा और उसके समर्थन आधार का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को एक साथ अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ने के बजाय अपनी नीतियों को लेकर स्पष्टता रखनी चाहिए।
उनके मुताबिक, सरकार को ऐसे फैसलों से बचना चाहिए जिनसे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो। उन्होंने कहा कि भाजपा के मुख्य समर्थक वर्ग को भी यह महसूस होना चाहिए कि सरकार उसके मूल मुद्दों और व्यापक राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए हुए है।
‘देश को पीछे नहीं, आगे ले जाने वाले कानून बनें’
पूर्व DGP ने केंद्र सरकार से भविष्य को ध्यान में रखकर कानून और नीतियां बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे कानूनों की जरूरत है जो समाज को जोड़ें और भारत को आगे ले जाएं।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उपलब्ध समय सीमित है और नेताओं को अपने कार्यकाल में ऐसे फैसले लेने चाहिए, जिनसे देश और देशवासियों का दीर्घकालीन हित सुनिश्चित हो।
वैद ने सामाजिक विभाजन को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न जातियों के बीच संघर्ष बढ़ता है तो उसका नुकसान समाज और देश को होगा। उन्होंने समाज को बांटने वाली परिस्थितियों से बचने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
‘भारत की ताकतवर सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देती है…’
अपने वीडियो संदेश में एसपी वैद ने हाल के एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले एक ऐसी पार्टी सामने आई जो उनके शब्दों में ‘मोबाइल पर बनी हुई पार्टी’ थी और उसने भारत की ताकतवर सरकार को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
यह टिप्पणी किस विशिष्ट राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में की गई, इसे लेकर उनके वीडियो के संदर्भ को अलग से देखा जाना जरूरी है। उनके बयान का मूल केंद्र सरकार से मजबूत और स्पष्ट निर्णय लेने की अपील पर रहा।
‘सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं’
एसपी वैद ने अपने संदेश में केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुई प्रगति और उठाए गए विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में काफी प्रगति हुई है और सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
हालांकि, उन्होंने साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आने वाले समय में ऐसे बड़े फैसले लेने की अपील की, जिन्हें वे देश और आम लोगों के हित में मानते हैं।
भाजपा नेतृत्व से देशहित में फैसलों की अपील
पूर्व DGP ने कहा कि देश के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से अभी भी काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने सरकार से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने, देश को आगे ले जाने वाली नीतियां बनाने और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की अपील की।
एसपी वैद का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब UGC की गाइडलाइंस, सामाजिक न्याय और विभिन्न वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। उनके बयान ने इन मुद्दों पर सरकार की नीतियों और भाजपा की राजनीतिक दिशा को लेकर एक नई सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है।


