फर्जी ट्रांसफर आदेश केस में जांच का दायरा बढ़ा, जेल जाने से पहले दो RMA अस्पताल में भर्ती; दो और संदिग्ध हिरासत में

बलौदाबाजार ( शिखर दर्शन ) // पलारी थाना क्षेत्र में सामने आए कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश के मामले में पुलिस की जांच अब और आगे बढ़ गई है। मामले में गिरफ्तार ग्रामीण चिकित्सा सहायक (RMA) करण कुमार देवांगन और रवि कुमार सेन को जेल भेजे जाने से पहले अचानक तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दोनों ने पेट दर्द और लूज मोशन की शिकायत की थी। पहले उन्हें पलारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। उपचार के बाद दोनों की हालत में सुधार बताया गया है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इधर, पुलिस ने जांच के दौरान दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है। साइबर सेल ने प्रणव अवस्थी को हिरासत में लिया है, जबकि पलारी पुलिस ने निजी कंप्यूटर ऑपरेटर प्रखर कश्यप को पकड़ा है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने जांच के सिलसिले में लैपटॉप, कंप्यूटर और प्रिंटर भी अपने कब्जे में लिए हैं।
अचानक बिगड़ी तबीयत, जिला अस्पताल में कराया भर्ती
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा के मुताबिक, दोनों आरोपियों को रात में पेट दर्द और लूज मोशन की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। दोनों का उपचार किया गया, जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। आवश्यक चिकित्सकीय हिदायतों के साथ उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दोनों आरोपियों को पुलिस की निगरानी में जेल दाखिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
बीमारी को लेकर चर्चाएं, लेकिन पुष्टि जरूरी
दोनों आरोपियों के जेल जाने से ठीक पहले अस्पताल में भर्ती होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ सूत्रों की ओर से बीमारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और यह आशंका जताई जा रही है कि जेल जाने या जमानत की प्रक्रिया से बचने के लिए ऐसा किया गया हो सकता है।
हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल ने दोनों के भर्ती होने और उपचार की पुष्टि की है। इसलिए बीमारी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सकीय रिपोर्ट और पुलिस जांच का इंतजार करना जरूरी होगा।
दो नए संदिग्ध हिरासत में, डिजिटल साक्ष्यों की जांच
मामले में पुलिस ने प्रणव अवस्थी और प्रखर कश्यप को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जांच के दौरान पुलिस लैपटॉप, कंप्यूटर और प्रिंटर भी अपने साथ ले गई है।
इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने में किन संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि दस्तावेज तैयार करने, उसमें कथित हस्ताक्षर लगाने और उसे प्रिंट करने में किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही।
ऐसे सामने आया था फर्जी आदेश का मामला
मामले की शुरुआत RMA करण कुमार देवांगन द्वारा 17 अगस्त को बीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी के समक्ष एक कथित स्थानांतरण आदेश प्रस्तुत करने से हुई थी। आदेश में उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोपर, विकासखंड भाटापारा स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख था।
दस्तावेज पर CMHO कार्यालय बलौदाबाजार-भाटापारा का आदेश क्रमांक और 14 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज थी। हालांकि, दस्तावेज की जांच के दौरान अधिकारियों को इसकी प्रामाणिकता पर संदेह हुआ।
इसके बाद बीएमओ कार्यालय ने CMHO कार्यालय से आदेश की पुष्टि कराई।
CMHO कार्यालय ने जारी करने से किया इनकार
जांच में CMHO कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि ऐसा कोई स्थानांतरण आदेश उनके कार्यालय से जारी नहीं किया गया था। कथित आदेश पर किए गए हस्ताक्षर भी वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाने की बात सामने आई।
कार्यालय की ओर से यह भी बताया गया कि करण देवांगन का पद राज्य संवर्ग के अंतर्गत आता है और उनके स्थानांतरण का अधिकार राज्य शासन के पास है। उस समय स्थानांतरण पर प्रतिबंध भी लागू था।
इसके बाद बीएमओ की शिकायत पर पलारी थाने में मामला दर्ज किया गया।
चार आरोपियों पर दर्ज है मामला
पुलिस ने इस मामले में भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल, RMA करण कुमार देवांगन और रवि कुमार सेन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
पुलिस के अनुसार, कथित फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसे सरकारी कार्यालय में वास्तविक आदेश के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
भाजपा ने दो नेताओं को संगठन से निकाला
मामला सामने आने के बाद भाजपा ने भी संगठनात्मक कार्रवाई की। पार्टी ने कृष्णा अवस्थी और पुनीराम पटेल को संगठन से निष्कासित कर दिया है।
अब दो नए संदिग्धों से पूछताछ और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से पुलिस को कथित फर्जी आदेश तैयार करने और उसे सरकारी कार्यालय तक पहुंचाने की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।



