6 सरकारी अस्पतालों के पानी में मिले ई-कोलाई बैक्टीरिया: मरीजों को मिलने वाले पेयजल पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट से हड़कंप

इंदौर ( शिखर दर्शन ) // सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों के लिए उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। शहर के 9 सरकारी अस्पतालों के पेयजल स्रोतों से लिए गए नमूनों की जांच में छह अस्पतालों के पानी में ई-कोलाई और टोटल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पतालों की पेयजल व्यवस्था और साफ-सफाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिन अस्पतालों के पानी के नमूनों में बैक्टीरिया मिले हैं, उनमें पीसी सेठी अस्पताल, एमवाय अस्पताल, मानसिक चिकित्सालय, जिला अस्पताल, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल शामिल हैं।
ई-कोलाई मिलना मलजनित प्रदूषण का संकेत
ई-कोलाई को सामान्य तौर पर मलजनित प्रदूषण का संकेत माना जाता है। पेयजल में इसकी मौजूदगी पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दूषित पानी पीने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है, खासकर अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर हो सकती है।
RO प्लांट बंद, वाटर कूलर के आसपास भी गंदगी
जांच के दौरान अस्पतालों में मरीजों और परिजनों के लिए लगाए गए आरओ प्लांट और अन्य पेयजल स्रोतों से पानी के नमूने लिए गए थे। कई जगह आरओ प्लांट बंद मिले। कुछ अस्पतालों में वाटर कूलर के आसपास साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
जिला अस्पताल की पेयजल व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। यहां सामाजिक संस्था की ओर से लोटों के जरिए पानी वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सातवीं मंजिल के पानी में भी बैक्टीरिया
जांच रिपोर्ट के मुताबिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सातवीं मंजिल पर लगे आरओ और कैंटीन से लिए गए पानी के नमूनों में भी ई-कोलाई और टोटल कॉलीफॉर्म पाए गए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर पेयजल में इस तरह के बैक्टीरिया मिलना साफ-सफाई और जल शुद्धिकरण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मरीजों की सेहत के लिए बढ़ सकती है परेशानी
अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज पहले से ही अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में यदि उन्हें अस्पताल परिसर में ही दूषित पानी उपलब्ध होता है तो संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।
जांच रिपोर्ट के बाद अब अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि दूषित पाए गए पेयजल स्रोतों की तत्काल सफाई और जांच कराई जाए, बंद आरओ प्लांट को दुरुस्त कराया जाए तथा पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।



