67 साल पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग बनी मुसीबत , बारिश में टपकने लगी प्रशासन की छत , नई इमारत की उठी मांग

लगातार बारिश से कार्यालयों में भरा पानी, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की चुनौती; कर्मचारियों ने कलेक्टर से लगाई स्थायी समाधान की गुहार
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // शहर की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र रही पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग अब अपनी जर्जर हालत के कारण गंभीर चिंता का विषय बन गई है। वर्ष 1959 में निर्मित यह भवन लगातार हो रही बारिश के बीच जगह-जगह से टपकने लगा है। कई कार्यालयों में पानी भरने से शासकीय कामकाज प्रभावित हो रहा है, वहीं महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड भी नुकसान के खतरे में हैं। इस स्थिति को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर जल्द समाधान की मांग की है।
बारिश ने खोली 67 साल पुरानी इमारत की पोल
लगातार हो रही बारिश के कारण कम्पोजिट बिल्डिंग की छतों से पानी का रिसाव तेज हो गया है। कई कमरों में पानी टपकने और भरने से कर्मचारियों को काम करने में परेशानी हो रही है। वहीं रोजमर्रा के कार्यों के लिए आने वाले आम नागरिकों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने कलेक्टर को बताई समस्याएं
बुधवार को भवन में संचालित विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि बरसात के दौरान छतों से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे कार्यालयीन कार्य बाधित हो रहे हैं और महत्वपूर्ण अभिलेखों तथा सामग्री के खराब होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के समक्ष भवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- 67 वर्ष पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई प्रशासनिक इमारत का निर्माण।
- बारिश के बाद भवन की व्यापक मरम्मत और रंग-रोगन।
- पुरुष एवं महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं आधुनिक शौचालयों का निर्माण।
- पर्याप्त वाहन पार्किंग की व्यवस्था।
- बढ़ती बिजली आवश्यकता को देखते हुए नया ट्रांसफॉर्मर एवं विद्युत लाइन की स्थापना।
कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बैठक के दौरान ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि बरसात समाप्त होने के बाद सितंबर माह से भवन की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्यों की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी, ताकि कर्मचारियों और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
स्थायी समाधान की मांग हुई तेज
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रही यह इमारत अब अपनी उपयोगिता की सीमा पार कर चुकी है। ऐसे में केवल अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई और आधुनिक प्रशासनिक भवन का निर्माण ही स्थायी समाधान है।
उन्होंने प्रशासन से जल्द निर्णय लेकर सुरक्षित, सुविधायुक्त और आधुनिक कार्यालय परिसर विकसित करने की मांग की है।



