कलेक्टर का बड़ा एक्शन: लापरवाही पर जिला शिक्षा अधिकारी को थमाया कारण बताओ नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब

जनदर्शन की शिकायतों के लंबित निराकरण और निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की धीमी प्रगति पर कलेक्टर कुणाल दुदावत सख्त, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
कोरबा ( शिखर दर्शन ) // शासकीय कार्यों में लापरवाही और जनदर्शन के आवेदनों के समयबद्ध निराकरण में गंभीर उदासीनता बरतने के आरोप में कोरबा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कुणाल दुदावत ने जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों और आम नागरिकों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी को तीन दिवस के भीतर अभिलेखों सहित उपस्थित होकर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
जनदर्शन की शिकायतों के निराकरण में मिली गंभीर लापरवाही
28 जुलाई को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित जनदर्शन के लंबित मामलों की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं किया गया और विभाग अपेक्षित जानकारी भी प्रस्तुत नहीं कर सका।
इन मामलों पर जताई गई नाराजगी
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से निम्न मामलों में असंतोष व्यक्त किया—
- हाईस्कूल गोपालपुर में मानदेय गणित व्याख्याता भर्ती में अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थी का चयन नहीं होने की शिकायत।
- सेवानिवृत्त शिक्षक को जीवन निर्वाह संबंधी देय राशि का भुगतान लंबित रहने का मामला।
- मानदेय शिक्षक भर्ती में अधिक मेरिट होने के बावजूद चयन से वंचित अभ्यर्थी की शिकायत।
- छात्र सुरक्षा बीमा योजना के पात्र हितग्राही को सहायता राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने का मामला।
कलेक्टर ने कहा कि इन मामलों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।
निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की धीमी प्रगति पर भी सख्ती
कलेक्टर ने शासन की महत्वपूर्ण निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना 2026-27 के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक की पुस्तकों की स्कैनिंग और प्रगति रिपोर्ट को भी असंतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में इस प्रकार की धीमी प्रगति स्वीकार्य नहीं है।
तीन दिन में मांगा जवाब, कार्रवाई की चेतावनी
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे तीन दिनों के भीतर संबंधित लिपिक, प्रधान पाठक अथवा प्रभारी अधिकारी के साथ सभी आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर स्पष्ट जवाब दें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक जवाबदेही से कोई समझौता नहीं
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है कि वह आम नागरिकों की समस्याओं का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित करे तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन करे।
उन्होंने दोहराया कि जनहित के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



