भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था बरकरार, हिंदू पक्ष की पूजा जारी; नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान पर विचार

भोपाल/धार ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था को जारी रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने हिंदू पक्ष की पूजा-अर्चना जारी रखने की अनुमति बरकरार रखी, जबकि मुख्य भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी। साथ ही मुस्लिम पक्ष के लिए जुमे की नमाज हेतु वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के संबंध में राज्य सरकार को निर्देश दिए गए। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- हिंदू पक्ष की दैनिक पूजा-अर्चना पूर्ववत जारी रहेगी।
- मुख्य भोजशाला परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई।
- मध्य प्रदेश सरकार को जुमे की नमाज के लिए दोपहर 1 से 3 बजे के बीच परिसर के समीप वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
- भोजशाला के मूल ढांचे में न्यायालय की अनुमति के बिना कोई भौतिक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
- हाई कोर्ट के पूर्व आदेश पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया।
- मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किए गए।
- अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
सुनवाई में किन पक्षों ने रखी दलील
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ैफा अहमदी, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद ने पैरवी की। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह उपस्थित रहे।
हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन, विनय जोशी, रंजीत कुमार और सी. एस. वैद्यनाथन ने पक्ष रखा।
आरिफ मसूद की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने कहा कि उनकी याचिका में नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान की मांग नहीं की गई थी, बल्कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति देने की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि अभी न्यायालय का विस्तृत लिखित आदेश आना शेष है। अंतिम आदेश आने तक सभी पक्षों को धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अंतिम निर्णय का इंतजार किया जाना चाहिए।



