मध्यप्रदेश

बकरीद से पहले आईएएस नियाज खान का संदेश: पशुओं की बलि को बताया अनुचित, बोले– धरती सबकी है सिर्फ इंसानों की नहीं , कहा– पशुओं की बलि उचित नहीं, सभी जीवों की होनी चाहिए रक्षा

विशेष रिपोर्ट:

भोपाल (शिखर दर्शन) // मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी और नॉवेल लेखक नियाज खान ने बकरीद से ठीक पहले पशु बलि के खिलाफ आवाज उठाई है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि इस धरती पर केवल इंसानों का नहीं, बल्कि सभी जीवों का अधिकार है। उन्होंने पशुओं की बलि को पूरी तरह अनुचित करार देते हुए कहा कि हमें सबकी रक्षा करनी चाहिए।

लोक निर्माण विभाग में उप सचिव नियाज खान ने दो महत्वपूर्ण पोस्ट करते हुए लिखा, “यह धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है। पेड़, पौधे, जीव-जंतु सभी का इस धरती पर समान अधिकार है और इनकी रक्षा भी जरूरी है।” आगे उन्होंने दो टूक लिखा, “पशुओं का खून बहाना कहीं से भी उचित नहीं है।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब देशभर में बकरीद की तैयारियां चल रही हैं और कुर्बानी को लेकर बहस तेज है। उन्होंने इससे एक दिन पहले जलवायु परिवर्तन पर भी चिंता जाहिर करते हुए लिखा था कि “मौसम का असंतुलन और तापमान में बढ़ोतरी जलवायु आपदा की ओर इशारा कर रहा है। भौतिकवाद में डूबी दुनिया इस पर गंभीर नहीं है। इस ग्रह को बचाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।”

शाकाहार के पक्षधर

आईएएस नियाज खान पहले भी शाकाहार की वकालत कर चुके हैं। 24 फरवरी की अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा था, “दुनिया में सबसे अधिक शाकाहारी भारत में हैं। जैसे हमने योग को वैश्विक पहचान दिलाई, वैसे ही शाकाहार को भी फैलाना चाहिए।” उन्होंने पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा को भी शाकाहार का मूल बताया।

अक्सर बयानों से रहते हैं चर्चा में

छत्तीसगढ़ मूल के 2015 बैच के आईएएस अफसर नियाज खान प्रशासनिक सेवा से प्रमोशन पाकर आईएएस बने हैं। वे अब तक सात नॉवेल लिख चुके हैं। उनकी एक किताब पर चर्चित वेब सीरीज़ ‘आश्रम’ बनी, जिस पर उन्हें क्रेडिट न मिलने के कारण उन्होंने निर्माताओं के खिलाफ अदालत का रुख किया था।

उन्होंने अपनी किताब ‘ब्राह्मण द ग्रेट’ के जरिए सनातन धर्म और ब्राह्मणों की महत्ता को दर्शाया, जिस पर खासा विवाद भी हुआ था। सामाजिक और नैतिक विषयों पर बेबाक राय रखने के लिए वे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं।


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