छत्तीसगढ़ में शिवसेना शिंदे गुट का मिशन 2028: 20 विधानसभा सीटों पर फोकस, 18 जिलों में संगठन विस्तार; भाजपा को बताया ‘बड़ा भाई’
बिलासपुर से डॉ. अभिषेक वर्मा ने खोला पार्टी के विस्तार का रोडमैप, हिंदुत्व, घर वापसी, शिक्षा-स्वास्थ्य और युवाओं को भी एजेंडे में शामिल किया

छत्तीसगढ़ की सियासत में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) ने राज्य में अपने राजनीतिक विस्तार का रोडमैप सामने रखा है। बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा कि संगठन राज्य की 20 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में संपर्क और संगठन विस्तार अभियान चलाने की जानकारी भी दी।
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) //
डॉ. अभिषेक वर्मा के बयान में संगठन विस्तार के साथ गठबंधन की राजनीति का संकेत भी प्रमुख रहा। उन्होंने भाजपा को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में NDA के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही। शिवसेना की ओर से हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, घर वापसी, धर्म परिवर्तन, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया गया।
20 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस
डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा कि शिवसेना शिंदे गुट आने वाले समय में एक मजबूत राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। छत्तीसगढ़ में पार्टी की गतिविधियों को 18 जिलों तक विस्तार देने की बात कही गई।
दुर्ग, बिलासपुर और बिरगांव सहित विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना है।
पार्टी ने राज्य की 20 विधानसभा सीटों को अपने प्राथमिक राजनीतिक फोकस में रखने की बात कही है। हालांकि प्रेस वार्ता में इन 20 सीटों के नाम और प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित चुनावी रणनीति का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया।
भाजपा ‘बड़ा भाई’, NDA के साथ चुनावी रणनीति
छत्तीसगढ़ की राजनीति में शिवसेना की संभावित भूमिका को लेकर गठबंधन संबंधी बयान महत्वपूर्ण रहा। डॉ. अभिषेक वर्मा ने भाजपा को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव NDA के साथ मिलकर लड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
इससे संकेत मिलता है कि पार्टी एक ओर छत्तीसगढ़ में अपना स्वतंत्र संगठनात्मक आधार मजबूत करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर NDA के व्यापक राजनीतिक ढांचे के भीतर अपनी भूमिका को लेकर भी आगे बढ़ रही है।
2028 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है। ऐसे में सीटों के बंटवारे और गठबंधन की अंतिम तस्वीर भविष्य में तय होना बाकी है।
‘राष्ट्र प्रथम, जनता सर्वोपरि’ बताया विजन
डॉ. वर्मा ने पार्टी के विजन को ‘राष्ट्र प्रथम, जनता सर्वोपरि’ बताया। उनके अनुसार संगठन का उद्देश्य केवल सत्ता की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंच पर उठाना भी है।
उन्होंने हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को पार्टी के राजनीतिक विचारों का हिस्सा बताते हुए छत्तीसगढ़ को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग का भी उल्लेख किया।
घर वापसी और धर्म परिवर्तन पर जोर
धर्म परिवर्तन से जुड़े सवाल पर डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा कि शिवसेना छत्तीसगढ़ में ‘घर वापसी’ के लिए काम कर रही है।
उन्होंने धर्म परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए बेहतर शिक्षा और जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर भी रखी राय
महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर भी डॉ. वर्मा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी को पहला और हिंदी को दूसरा स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र आने वाले लोगों को कम से कम इतनी बुनियादी मराठी आनी चाहिए कि वे सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर लगे साइन बोर्ड पढ़ सकें। साथ ही उन्होंने भाषा के नाम पर विवाद से बचने की अपील करते हुए कहा कि भाषा को लेकर होने वाले विवाद समाज को विभाजित करते हैं।
श्रीकांत वर्मा और बालासाहेब ठाकरे के संबंधों का जिक्र
प्रेस वार्ता में डॉ. अभिषेक वर्मा ने अपने पिता और प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीकांत वर्मा तथा शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उनके पिता के समय की कांग्रेस और वर्तमान कांग्रेस के बीच काफी अंतर आ चुका है।
श्रीकांत वर्मा का साहित्य और राजनीति दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सार्वजनिक जीवन रहा है। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार वे दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे।
साहित्यकारों के लिए 21 लाख और पत्रकारों के लिए 5 लाख के सम्मान की घोषणा
राजनीतिक मुद्दों के साथ डॉ. वर्मा ने साहित्य और पत्रकारिता क्षेत्र के लिए सम्मान योजना की घोषणा भी की।
उन्होंने बताया कि अपने पिता श्रीकांत वर्मा की स्मृति में साहित्यकारों को 21 लाख रुपये और पत्रकारों को 5 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संचालित करने की बात कही।
शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं पर भी जोर
डॉ. वर्मा ने देश के विकास में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की आवश्यकता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इन क्षेत्रों में और काम किए जाने की जरूरत है।
बिलासपुर से छत्तीसगढ़ की बड़ी राजनीतिक तस्वीर की ओर संकेत
शिवसेना शिंदे गुट की बिलासपुर प्रेस वार्ता में संगठन विस्तार और आगामी चुनावी रणनीति से जुड़े कई बिंदु सामने आए। इनमें 20 विधानसभा सीटों पर फोकस, 18 जिलों में संगठन विस्तार, NDA के साथ चुनावी तालमेल तथा हिंदुत्व, घर वापसी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
पार्टी के 20 सीटों पर फोकस और NDA के साथ चुनाव लड़ने संबंधी दावे की जानकारी अन्य हालिया रिपोर्टों में भी सामने आई है।
2028 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है और गठबंधन की अंतिम चुनावी तस्वीर भविष्य में स्पष्ट होगी। फिलहाल बिलासपुर से शिवसेना शिंदे गुट ने छत्तीसगढ़ में अपनी संगठनात्मक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में सक्रियता का संकेत दिया है।



