20 अगस्त महाकाल भस्म आरती: अष्टमी पर भांग-चंदन और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल, दिव्य स्वरूप में दिए दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सावन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत से अभिषेक किया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
भगवान महाकाल को दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की विशेष पूजा के दौरान पूरा गर्भगृह भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
भस्म अर्पण के बाद साकार स्वरूप में दर्शन
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान और कपूर आरती संपन्न हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से भगवान का मनोहारी अलंकरण किया गया।
जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। आज की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। इस दौरान मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।



