TET अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में उभरा शिक्षकों का आक्रोश: छत्तीसगढ़ से हजारों शिक्षक पहुंचे प्रदर्शन में

रामलीला मैदान में राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन, कानून वापस लेने की मांग; सांसद जगदंबिका पाल ने दिया समर्थन
रायपुर/नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // टीईटी अनिवार्यता को लेकर देशभर के शिक्षकों में बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आयोजित विशाल प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए।
‘काला कानून’ बताते हुए खत्म करने की मांग
आंदोलनकारियों ने टीईटी की अनिवार्यता को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। उनका कहना है कि इस नियम के कारण वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।
नेताओं ने दी चेतावनी, आंदोलन होगा और तेज
टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिक्षकों के भविष्य पर सीधा हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो देशभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सांसद जगदंबिका पाल का समर्थन
प्रदर्शन के दौरान भाजपा सांसद जगदंबिका पाल भी रामलीला मैदान पहुंचे और शिक्षकों का समर्थन किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा तथा किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- टीईटी की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए
- संबंधित कानून वापस लिया जाए
- शिक्षकों की नौकरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
छत्तीसगढ़ से बड़ी भागीदारी
इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इनमें मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर, प्रदीप पांडे, कमलेश बिसेन और रामचंद सोनवंशी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल शिक्षक संगठनों की नजर केंद्र सरकार के रुख पर टिकी है। नेताओं का कहना है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।



