863 मंदिरों वाला अद्भुत पर्वत, जहां सूर्यास्त के बाद रुकना है मना

पालीताना का शत्रुंजय पर्वत बना आस्था का केंद्र, हजारों श्रद्धालु कर रहे दर्शन
भावनगर, गुजरात (शिखर दर्शन) // महावीर जयंती के पावन अवसर पर जैन धर्मावलंबी पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान महावीर का जन्मोत्सव मना रहे हैं। इस खास दिन पर गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालीताना तीर्थ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
जैन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थों में से एक शत्रुंजय पर्वत पर बसे इस पवित्र स्थल को “मंदिरों का शहर” भी कहा जाता है। यहां एक ही पहाड़ पर करीब 863 संगमरमर के भव्य मंदिर निर्मित हैं, जो अपनी अद्भुत शिल्पकला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि जैन धर्म के 24 में से 23 तीर्थंकरों ने, नेमिनाथ को छोड़कर, इस पर्वत को अपनी उपस्थिति से पावन किया था।
इस पवित्र धाम तक पहुंचना भी आसान नहीं है। श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 3500 से 3800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। भक्त इस कठिन यात्रा को आस्था, तप और साधना का हिस्सा मानते हुए पूर्ण करते हैं। जैन धर्म में यह विश्वास है कि जीवन में एक बार यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस तीर्थ की सबसे अनोखी परंपरा इसे और भी विशेष बनाती है। सूर्यास्त के बाद इस पहाड़ी पर किसी भी व्यक्ति को रुकने की अनुमति नहीं होती। यहां तक कि मंदिरों के पुजारी भी शाम से पहले नीचे उतर जाते हैं। इस स्थान को देवताओं का निवास मानते हुए यह परंपरा वर्षों से सख्ती के साथ निभाई जा रही है, जो इसकी पवित्रता और रहस्यमयता को और बढ़ा देती है।




