यूनुस युग समाप्त: बांग्लादेश में नई सरकार के साथ चीन की रणनीति पर ब्रेक, अमेरिका की सक्रियता से भारत को भी राहत

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन तय: तारिक रहमान की BNP को बहुमत, चीन-अमेरिका की रणनीतिक रस्साकशी तेज
ढाका ( एजेंसी ) // बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिलता दिख रहा है। औपचारिक ऐलान शेष है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसके साथ ही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का दौर समाप्त होने जा रहा है।
अमेरिका की नजर नई सरकार पर, चीन के प्रभाव पर चिंता
ढाका में अमेरिका के राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर वॉशिंगटन चिंतित है। अमेरिका बांग्लादेश की नई सरकार को चीनी सैन्य उपकरणों के विकल्प के रूप में अमेरिकी और सहयोगी देशों के रक्षा सिस्टम की पेशकश करने की योजना बना रहा है।
अमेरिका का मानना है कि रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी और व्यापारिक कूटनीति के जरिए बांग्लादेश के साथ संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। क्रिस्टेंसन ने कहा कि अंतरिम सरकार के साथ जिन क्षेत्रों में प्रगति हुई है, उन्हें नई सरकार के साथ और आगे बढ़ाया जाएगा, खासकर आर्थिक, व्यावसायिक और सुरक्षा क्षेत्र में।
चीन की बढ़ती सक्रियता और भारत की चिंता
पिछले कुछ समय में चीन ने बांग्लादेश में अपने रणनीतिक कदम तेज किए हैं। हाल ही में बीजिंग और ढाका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिनमें भारत सीमा के निकट ड्रोन फैक्ट्री स्थापित करने की योजना भी शामिल बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में चीन की बढ़ती दखलंदाजी भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। यदि नई सरकार अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाती है, तो इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।
शेख हसीना प्रकरण के बाद बदला समीकरण
राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान भारत समर्थक मानी जाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद से बांग्लादेश की विदेश नीति में नए समीकरण उभरने लगे। इसी बदलाव के दौर में चीन ने अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश की।
अब BNP के नेतृत्व में संभावित नई सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह चीन, अमेरिका और भारत जैसे प्रमुख देशों के बीच संतुलन कैसे बनाए।
निवेश और आर्थिक सुधार पर अमेरिका का जोर
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह बांग्लादेश में निवेश के अनुकूल वातावरण चाहता है, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें और अर्थव्यवस्था मजबूत हो। वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई किसी भी सरकार के साथ वह काम करने को तैयार है।
बांग्लादेश की नई राजनीतिक दिशा न केवल देश की आंतरिक नीतियों को प्रभावित करेगी, बल्कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। आने वाले दिनों में नई सरकार के औपचारिक गठन के साथ यह स्पष्ट होगा कि ढाका किस वैश्विक शक्ति के साथ कितना और किस तरह कदम मिलाता है।



