18 महीने बाद सत्ता परिवर्तन: बांग्लादेश में बीएनपी को पूर्ण बहुमत, अंतरिम सरकार का अंत तय

ढाका ( एजेंसी ) // बांग्लादेश में गुरुवार, 12 फरवरी को हुए आम चुनाव के बाद मतगणना के शुरुआती रुझानों ने बड़ा राजनीतिक संकेत दे दिया है। करीब 18 महीने पहले जुलाई 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला आम चुनाव था। ताजा आंकड़ों के अनुसार बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है और अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त होना तय माना जा रहा है।
300 सदस्यीय संसद में बहुमत का आंकड़ा पार
सुबह आए रुझानों के मुताबिक बीएनपी अब तक 151 सीटें जीत चुकी है, जो 300 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए पर्याप्त है। वहीं इत्तेफाक अखबार द्वारा संकलित अनौपचारिक परिणामों में बीएनपी को 158 सीटें मिलने की बात कही गई है।
कट्टर इस्लामिक दल जमात-ए-इस्लामी को 41 से 43 सीटें मिलने के संकेत हैं, जिससे वह मुख्य विपक्ष की भूमिका में उभर सकती है। अन्य दलों को अब तक पांच सीटें मिली हैं। कुल 299 निर्वाचन क्षेत्रों में से 204 में मतगणना पूरी हो चुकी है।
अवामी लीग की अनुपस्थिति में सीधा मुकाबला
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग हो चुकी पार्टी अवामी लीग इस चुनाव में मैदान में नहीं थी। ऐसे में मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच रहा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी दलों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और बीएनपी गठबंधन ने निर्णायक बढ़त बना ली है।
तारिक रहमान की जीत, प्रधानमंत्री पद की राह साफ
बीएनपी पहले ही ऐलान कर चुकी थी कि सत्ता में आने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। चुनाव आयोग के अनौपचारिक परिणामों के अनुसार, तारिक रहमान ने अपने गृह जिले बुगुरा से 2,16,284 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात के आबिदुर रहमान को 97,626 वोट मिले।
तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया के बेटे हैं। करीब 20 साल बाद उनकी पार्टी फिर से सत्ता में वापसी करती दिख रही है।
अंतरिम सरकार का 18 माह का शासन समाप्त
जुलाई 2024 के उथल-पुथल भरे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बनी अंतरिम सरकार ने लगभग डेढ़ साल तक देश की बागडोर संभाली। बीएनपी की जीत के साथ ही इस अंतरिम व्यवस्था का अंत तय हो गया है और नई निर्वाचित सरकार जल्द शपथ ले सकती है।
फिलहाल मतगणना जारी है, लेकिन शुरुआती रुझान बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव की पुष्टि कर रहे हैं।



