बस्तर पंडुम में उभरी जनजातीय जीवन की सजीव तस्वीर, प्रदर्शनी से प्रभावित हुए गृहमंत्री अमित शाह, विजेताओं का हुआ सम्मान

जगदलपुर ( शिखर दर्शन ) // संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक ज्ञान को करीब से जाना तथा इसकी मुक्तकंठ से सराहना की।
केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस एवं लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा-आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन और लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी को देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि “बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है, जिसे सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा व आभूषण आकर्षण का केंद्र रहे। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं वैद्यराजों द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा।
पारंपरिक स्वादों ने मोहा मन
स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
जनजातीय संस्कृति को सहेजने का सशक्त माध्यम है बस्तर पंडुम: सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त मंच है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिताओं में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के विजेता
- जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा)
- जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा)
- जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा)
- जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)
- जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा)
- जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
- जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर)
- जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर)
- जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर)
- जनजातीय व्यंजन – ताराबती (दंतेवाड़ा)
- आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव)
- बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)
स्कूली बच्चों की प्रस्तुति ने जीता दिल
समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। हजारों बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनोहारी प्रस्तुति दी, जिसे देखकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भावविभोर हो उठे और तालियों के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मलखंभ प्रदर्शन को भी जमकर सराहा गया।

उल्लेखनीय है कि यह गीत हिंदी और हल्बी बोली में रचा गया है, जिसमें बादल अकादमी के कलाकारों का योगदान है। दायरा बैंड द्वारा इसे आधुनिक संगीत का स्वरूप दिया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।



