मंदिर–मस्जिद के बीच सामुदायिक भवन को लेकर विवाद, पुलिस हस्तक्षेप के बाद भूमिपूजन रोका गया

भिलाई ( शिखर दर्शन ) // दुर्ग जिले के संतोषीपारा वार्ड क्रमांक 33 में प्रस्तावित सामुदायिक भवन को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद गहराता नजर आया। बुधवार को भवन के भूमिपूजन के दौरान मंदिर और मस्जिद के बीच स्थित खाली शासकीय भूमि पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
भूमिपूजन के विरोध में बजरंग दल के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग पहुंचे और नारेबाजी की। विरोध कर रहे लोगों का आरोप था कि यह सामुदायिक भवन मस्जिद और मदरसे के उपयोग के लिए बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि भवन बनने के बाद वहां आयोजनों के दौरान मांसाहारी भोजन बनेगा और मंदिर के सामने गंदगी फैलने से धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। इसी को लेकर हिंदू समाज ने मंदिर के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनाने की मांग भी रखी।
विवाद बढ़ता देख वार्ड पार्षद डी. शैलजा ने एहतियातन भूमिपूजन की प्रक्रिया रोक दी। सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। सीएसपी प्रशांत पैकरा और छावनी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों को शांत कराया और अपनी-अपनी आपत्तियां नगर निगम प्रशासन के समक्ष रखने की समझाइश दी।
पार्षद डी. शैलजा ने बताया कि यह भवन शासकीय भूमि पर अधोसंरचना मद से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित था, जिसका उद्देश्य सभी समुदायों के लिए उपयोगी सामुदायिक सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, आपसी मतभेद के चलते स्थिति विवादपूर्ण हो गई।
वहीं मुस्लिम समुदाय का कहना है कि क्षेत्र में वर्षों से आपसी भाईचारा बना हुआ है और उन्हें सामुदायिक भवन को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि भवन नहीं भी बनता है तो वे किसी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे। दूसरी ओर विरोध कर रहे लोग अपने रुख पर अड़े हुए हैं और उस स्थान पर सामुदायिक भवन न बनने देने की बात कह रहे हैं।



