डूबेगी बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री ? EU डील और बजट सुधार से भारत का कपड़ा उद्योग हुआ मजबूत

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // भारत सरकार के बजट 2026 और यूरोपीय यूनियन के साथ हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने दक्षिण एशिया के कपड़ा उद्योग में हलचल मचा दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2026 को पेश किए गए बजट में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और नई नीतियों की घोषणा की, जिससे भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक बाजार में मजबूती मिलने की संभावना है।
बजट में सिल्क प्रोडक्शन, मशीनरी सपोर्ट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम के साथ-साथ टेक्सटाइल सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट और लेबर-इंटेंसिव उद्योगों के लिए विशेष नीतियों पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता, रोजगार, इनोवेशन और ग्लोबल कंपटीटिवनेस बढ़ाना है।
विशेष रूप से बांग्लादेश के लिए यह बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक है, जबकि भारत छठे स्थान पर है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश का कपड़ा निर्यात 52.9 अरब डॉलर था, जबकि भारत ने टेक्सटाइल, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट का कुल 37.7 अरब डॉलर का निर्यात किया।
यूरोपीय यूनियन के 263 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में चीन के बाद बांग्लादेश का सबसे बड़ा हिस्सेदार होना इसकी ताकत को दर्शाता है। वर्तमान में बांग्लादेश को EU में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिला हुआ है और उसका बाजार हिस्सा 21-22 प्रतिशत है। भारत की हिस्सेदारी केवल 5-6 प्रतिशत है, क्योंकि भारतीय निर्यात पर 9-12 प्रतिशत टैक्स लगता है। हालाँकि, भारत-ईयू FTA के बाद ये टैक्स खत्म हो जाएंगे, जिससे भारत का कपड़ा निर्यात तेजी से बढ़ेगा और बांग्लादेश के लिए नई चुनौतियां खड़ी होंगी।
भारत सरकार ने 2030 तक टेक्सटाइल और कपड़ों के निर्यात को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। बजट 2026 और FTA की घोषणाओं के बाद भारत इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, जबकि बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कठिन दौर का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बजट और FTA के बाद दक्षिण एशिया के कपड़ा उद्योग में भारत की स्थिति मजबूत होगी, जबकि बांग्लादेश के लिए बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण साबित होगा।



