महाराष्ट्र निगम चुनाव में राज ठाकरे को करारा झटका: 22 नगर निगमों में मनसे का खाता तक नहीं खुला, मुंबई में दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सकी पार्टी , ‘मराठी मानुस’ का एजेंडा चलाने वाले को मराठियों ने ही नकारा

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: राज ठाकरे की मनसे का करारी हार, 22 शहरों में खाता भी नहीं खुला

मुंबई ( शिखर दर्शन ) // महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद अब नगर निगम चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एकतरफा जीत दर्ज की है। राज्य की कुल 29 नगर निगमों में से 24 पर भाजपा गठबंधन का परचम लहराता दिख रहा है। इस प्रचंड जीत के सामने कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), शरद पवार की एनसीपी और खासतौर पर राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) पूरी तरह कमजोर साबित हुई है।
सबसे बड़ा झटका मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में देखने को मिला, जहां 30 साल बाद भाजपा गठबंधन ने कब्जा जमाया है। 20 साल बाद ठाकरे बंधुओं—राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे—के साथ आने के बावजूद भाजपा को रोकने में वे नाकाम रहे। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी में मनसे दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।

मनसे का निराशाजनक प्रदर्शन
नगर निगम चुनावों के रुझानों के अनुसार, राज्यभर में मनसे का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। ‘मराठी मानुस’ के एजेंडे के साथ चुनाव लड़ने वाली पार्टी को 22 शहरों में एक भी सीट नहीं मिलती दिख रही है। मुंबई में 277 सीटों में से मनसे केवल 5 सीटों पर आगे है। पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाई।
प्रमुख आंकड़े (रुझान)
- बीजेपी: 1064 वार्डों में बढ़त
- शिंदे गुट की शिवसेना: 282 वार्ड
- शिवसेना (यूबीटी): 109 वार्ड
- एनसीपी (अजित पवार): 113 वार्ड
- एनसीपी (शरद पवार): 24 वार्ड
- कांग्रेस: 222 वार्ड
- मनसे: सिर्फ 12 वार्डों में बढ़त
शहरवार स्थिति
- कल्याण–डोंबिवली: 122 सीटों में मनसे 4 पर आगे
- ठाणे: 131 में से सिर्फ 1 सीट
- नवी मुंबई: 111 में से 1 सीट
- नासिक: 122 में से 2 सीट
- अहिल्यानगर: 68 में से 3 सीट
- उल्हासनगर: 1 सीट
पुणे, नागपुर, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, भिवंडी, पनवेल, संभाजीनगर, कोल्हापुर, सांगली-मिरज, सोलापुर, जलगांव, धुले, नांदेड़, लातूर, अमरावती, अकोला और चंद्रपुर सहित 22 शहरों में मनसे का खाता तक नहीं खुल सका।
नासिक में भी टूटता गढ़
नासिक, जहां कभी मनसे की सत्ता रही है, वहां पार्टी को केवल 2 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है। यह संकेत देता है कि पार्टी का पारंपरिक आधार भी कमजोर हो चुका है।

निष्कर्ष
नगर निगम चुनाव 2026 ने साफ कर दिया है कि राज ठाकरे की मनसे राज्य की शहरी राजनीति में हाशिये पर चली गई है। ठाकरे बंधुओं की एकजुटता भी भाजपा गठबंधन की लहर को रोक नहीं सकी। इन नतीजों को मनसे के लिए राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी को अपने अस्तित्व और रणनीति पर गंभीर मंथन की जरूरत है।



