‘खुद को दुनिया का जज न समझे अमेरिका’— अपने ‘घनिष्ठ सहयोगी’ पर कार्रवाई से भड़का चीन, UN में तीखी बहस, वॉशिंगटन को दी खुली चेतावनी

‘दुनिया का जज बनने का हक किसने दिया?’— मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़का चीन, UN में अमेरिका से सीधी भिड़ंत, ट्रंप के कदम को बताया खतरनाक मिसाल
बीते सप्ताह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर उनके ही आवास से सैन्य कार्रवाई के जरिए हिरासत में ले लिया गया। इस अप्रत्याशित ऑपरेशन में मादुरो और उनकी पत्नी को आधी रात राजधानी से उठाकर न्यूयॉर्क लाया गया, जहां दोनों फिलहाल अमेरिकी हिरासत में हैं। मादुरो पर ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जा रहा है। इस घटना ने न सिर्फ वेनेजुएला बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
मादुरो की गिरफ्तारी से वेनेजुएला के बड़े ट्रेड पार्टनर और ‘ऑल-वेदर स्ट्रैटेजिक सहयोगी’ चीन में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है।
‘कोई देश दुनिया का पुलिसवाला नहीं’— चीन का अमेरिका पर तीखा हमला
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी मिशन के प्रभारी सुन लेई ने सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सैन्य ताकत समस्याओं का समाधान नहीं होती और अंधाधुंध बल प्रयोग से हालात और बिगड़ते हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी अमेरिका पर निशाना साधते हुए साफ शब्दों में कहा,
“हम यह नहीं मानते कि कोई भी देश दुनिया का पुलिसवाला या जज बन सकता है।”
हालांकि वांग यी ने अमेरिका का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा सीधे तौर पर वेनेजुएला में हुए घटनाक्रम की ओर था।
अदालत में मादुरो, UN में अमेरिका पर सवाल
सोमवार को निकोलस मादुरो ने न्यूयॉर्क की अदालत में ड्रग्स से जुड़े सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उसी दौरान कुछ ही दूरी पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई, जिसे कोलंबिया के अनुरोध पर बुलाया गया था और चीन-रूस ने इसका समर्थन किया। बैठक में ट्रंप प्रशासन के फैसले पर व्यापक चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना भविष्य के लिए “खतरनाक मिसाल” बन सकता है।
अमेरिका के खिलाफ वैश्विक माहौल बना सकता है चीन
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन इस मुद्दे पर अमेरिका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय माहौल बना सकता है, खासकर विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के बीच। विश्लेषकों के अनुसार, चीन भले ही वेनेजुएला को तत्काल सैन्य या आर्थिक मदद न दे पाए, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका को घेरने में उसकी भूमिका अहम हो सकती है।
पुराना और मजबूत है चीन-वेनेजुएला रिश्ता
चीन-वेनेजुएला संबंधों की नींव 1974 में पड़ी थी, जो ह्यूगो चावेज के शासनकाल में और मजबूत हुई। 2013 में मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद भी यह साझेदारी जारी रही। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने वेनेजुएला के तेल, रिफाइनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश किए। 2024 में चीन ने वेनेजुएला से करीब 1.6 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें बड़ा हिस्सा तेल का था।
चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मादुरो की गिरफ्तारी को “बड़ा झटका” बताते हुए कहा कि चीन वेनेजुएला के लिए एक भरोसेमंद दोस्त की छवि बनाए रखना चाहता था। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही चीनी प्रतिनिधिमंडल ने मादुरो से मुलाकात की थी, जिससे यह नाराज़गी और गहरी हो गई।



