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JNU कैंपस में देर रात प्रदर्शन, मोदी–शाह पर ‘कब्र खुदेगी’ नारे से मचा बवाल

दिल्ली दंगा केस: उमर खालिद–शरजील इमाम को जमानत से इनकार के बाद JNU में विवादित नारे, सियासी घमासान तेज

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) परिसर में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान कुछ छात्रों और प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक व भड़काऊ नारे लगाए गए, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

वायरल वीडियो में ‘मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं। इन नारों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया तीखी हो गई है। भाजपा ने इसे गंभीर सुरक्षा और संवैधानिक मर्यादाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन आरोपियों पर गंभीर आरोप तय किए गए हैं, उनके समर्थन में इस तरह के धमकी भरे नारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘टुकड़े-टुकड़े इकोसिस्टम’ की मानसिकता को दर्शाता है।

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नारेबाजी की निंदा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ इस तरह के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री–गृह मंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल ऐसे तत्वों को परोक्ष समर्थन देते हैं।

एबीवीपी के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने भी जेएनयू में हुई नारेबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के नारे अब कैंपस में आम हो गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने को सही ठहराया।

वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि नीतियों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को धमकी देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका भी हो सकती है।

कांग्रेस नेता उदित राज ने अलग रुख अपनाते हुए कहा कि यह छात्रों की नाराजगी का तरीका है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जमानत फैसले के बाद जेएनयू में हुई नारेबाजी ने एक बार फिर कैंपस राजनीति, अभिव्यक्ति की सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर देशव्यापी बहस छेड़ दी है।

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