न्यूजीलैंड में सिख विरोधी प्रदर्शन: कथित खालिस्तान झंडा और गातरा पहनने पर विरोध प्रदर्शन

वेलिंगटन ( एजेंसी ) // – न्यूजीलैंड में 2026 के आम चुनाव से पहले सिखों, हिंदुओं और अन्य धार्मिक समुदायों को लेकर बयानबाजी और विरोध तेज हो गया है। ब्रायन टमाकी और डेस्टिनी चर्च से जुड़े समर्थक, साथ ही न्यूजीलैंड की न्यू नेशन पार्टी के पेज पर भारतीय समुदाय और उनके धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर बहस हो रही है।
टमाकी समर्थक सिखों के नगर कीर्तन को रोकने का वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। उनका दावा है कि विरोध सिखों के धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि खालिस्तानी झंडे लहराने, अलग कानून बनाने और बढ़ती विदेशियों की संख्या के खिलाफ है। न्यू नेशन पार्टी के ब्रेंट डगल्स ने भी कहा कि दक्षिण ऑकलैंड में टमाकी और डेस्टिनी चर्च के समर्थक सिख समुदाय से जुड़े कुछ मुद्दों को सामने ला रहे हैं।
सरकार का एंटी गुट और चुनावी माहौल
न्यूजीलैंड में इस साल आम चुनाव होने हैं। हालांकि चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इससे पहले ही माहौल को धार्मिक रंग देने का आरोप लगाया जा रहा है। टमाकी समर्थक गुट का कहना है कि सिखों, हिंदुओं और मुस्लिमों की बढ़ती संख्या और उनके धार्मिक कार्यक्रमों के कारण सरकार ने कई कानूनों में छूट दे दी है।
विदेशी समुदायों को नियमों में विशेष छूट
समर्थकों का दावा है कि सिखों के लिए ट्रैफिक नियम बदल दिए गए हैं। पगड़ी पहनने वाले सिख अगर 50 किमी प्रति घंटे तक की गति से बाइक चलाते हैं, तो उन्हें हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, धार्मिक कारणों से गातरा साथ रखने और मंदिर बनाने जैसी छूट भी दी गई है। गुट का कहना है कि यह अलग कानून न्यूजीलैंड के मूल नागरिकों के लिए लागू नहीं है।
हाका और सांस्कृतिक संघर्ष
टमाकी समर्थकों ने कहा कि उनका विरोध सिखों के नगर कीर्तन के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड में इमिग्रेशन और विदेशी विचारधाराओं के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर हाका प्रदर्शन का मकसद न्यूजीलैंड की संस्कृति को बचाना और कानून में समानता सुनिश्चित करना है।
खालिस्तानी झंडे और धार्मिक स्वतंत्रता पर विवाद
समर्थकों ने सड़कों पर खालिस्तानी झंडे फहराने और मंदिरों पर बड़े धार्मिक प्रतीकों को लगाने को भी आलोचना का विषय बनाया। उनका कहना है कि सरकार विदेशी धार्मिक समूहों के सामने कमजोर दिखाई देती है, जिससे ये समूह धीरे-धीरे अधिक स्वतंत्रता हासिल कर रहे हैं।
टमाकी समर्थक वीडियो में कहते हैं, “एक दिन हर जगह भारतीय मंदिर 50 फीट ऊंची मूर्तियों के साथ होंगे और मस्जिदें पांच बार अजान देंगी। सरकार नियमों में अलग-अलग छूट देकर एक वर्ग के आगे झुक रही है।”



