चीन और रूस ने मादुरो की गिरफ्तारी पर तीखी निंदा की, अमेरिका से तुरंत रिहाई की मांग; न्यूयॉर्क मेयर ममदानी भी नाराज

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और पत्नी को हिरासत में लिया, चीन-रूस-भारत समेत वैश्विक आलोचना
अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को राजधानी काराकास से पकड़कर अमेरिका ले लिया। इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना सामने आई है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेना गलत है और इसका हल केवल बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। रूस ने इसे ‘खुली सशस्त्र आक्रामकता’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाने की मांग की।
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने भी इस कदम को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ बताया और इसे अंतरराष्ट्रीय एवं अमेरिकी कानून का उल्लंघन करार दिया। ब्रिटेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के “अमेरिका अब वेनेजुएला को चलाएगा” बयान पर स्पष्टता की मांग की और कहा कि किसी तीसरे देश को वेनेजुएला की सरकार तय करने का अधिकार नहीं है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मादुरो पर आरोप लगाया कि उनके पास कई मौके थे, लेकिन उन्होंने ‘जंगली इंसान’ की तरह व्यवहार किया। रुबियो के अनुसार, मादुरो की लापरवाही और अमेरिका के साथ टकराव ने इस कार्रवाई को जन्म दिया।
भारत की पांच वामपंथी पार्टियों – CPI, CPI(M), CPI(ML) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी – ने भी अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। उन्होंने लैटिन अमेरिका के लोगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर व्यापक चिंता और आलोचना जारी है, जबकि अमेरिका का रुख स्पष्ट है कि यह कार्रवाई मादुरो के कथित अपराधों और आक्रामक रवैये का परिणाम है।



