भारत ने तेल रिफाइनरियों से मांगा हफ्तेभर का डेटा, अमेरिका के साथ ट्रेड डील को सशक्त बनाने की तैयारी

( एजेंसी ) // भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील बातचीत में अब एक अहम अपडेट सामने आया है। भारत सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों से रूस और अमेरिका से खरीदे गए कच्चे तेल का हफ्तेभर का डेटा मांगने के आदेश दिए हैं। यह कदम वॉशिंगटन के साथ संभावित ट्रेड डील को फाइनल करने और अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने रिफाइनरियों को निर्देश दिए हैं कि वे हफ्तेवार आधार पर तेल आयात का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराएँ। सूत्रों के अनुसार, यह डेटा सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के दिशा-निर्देशन में मांगा गया है, ताकि ट्रेड बातचीत में भारत सही स्थिति प्रस्तुत कर सके।
ट्रंप प्रशासन ने रूस से भारत के बड़े पैमाने पर तेल आयात के कारण भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था। पिछले साल से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है, और जुलाई में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने में असहमति के कारण बातचीत फेल भी हुई थी।
कड़े प्रतिबंधों और दबाव के चलते भारत का रूसी तेल आयात दिसंबर 2025 में 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन तक गिर गया, जो पिछले तीन सालों में सबसे निचला स्तर है। जून 2025 में यह आंकड़ा 2 मिलियन बैरल प्रति दिन था। आने वाले महीनों में रूसी तेल आयात 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से भी कम होने की संभावना है।
वहीं भारत अब रूस के विकल्प के तौर पर अमेरिका की ओर रुख कर रहा है। 2025 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में अमेरिका का हिस्सा 6.6 प्रतिशत था, जबकि रूस का हिस्सा 35 प्रतिशत। संभावित ट्रेड डील के तहत भारत अमेरिकी कच्चे तेल और गैस की खरीद बढ़ाकर अपने ट्रेड डेफिसिट को कम करने पर विचार कर रहा है।
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