नए साल पर महाकाल मंदिर में रिकॉर्ड भीड़: बाबा महाकालेश्वर के दरबार में उमड़ा आस्था का महासैलाब, घर बैठे भी करें दर्शन

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // नए साल के आगाज के साथ ही उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भक्त बाबा महाकाल के दर्शन कर नए वर्ष की शुरुआत करने की कामना लेकर पहुंचे हैं। अनुमान के मुताबिक, 1 जनवरी को मंदिर में 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन की संभावना है।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 25 से 30 दिसंबर के बीच केवल 6 दिनों में लगभग 11,89,740 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए हैं। 31 दिसंबर की रात से भक्तों का आगमन लगातार जारी है। वीकेंड और सार्वजनिक अवकाश के कारण प्रशासन का मानना है कि आज की भीड़ अनुमान से भी ज्यादा हो सकती है। उज्जैन की लगभग सभी होटलें और धर्मशालाएं पहले से ही फुल बुक हैं।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा
मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू की हैं। श्रद्धालुओं को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर चारधाम मंदिर से प्रवेश दिया जा रहा है। मंदिर परिसर में सख्त सुरक्षा, बैरिकेडिंग, कतार व्यवस्था, और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
पुलिस ने भीड़ की निगरानी के लिए 200 CCTV कैमरे और 5 ड्रोन यूनिट्स तैनात किए हैं। आगामी सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए रियल-टाइम फीड वाले ड्रोन भी एंट्री-एग्जिट और इंदौर रोड पर लगाया गया है। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि रात 10 बजे से भस्म आरती के लिए व्यवस्था शुरू की गई थी और यातायात डायवर्जन प्लान पहले ही जारी किया गया था, जिसका पालन श्रद्धालु कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव
जयपुर से आए भक्त डॉ. भारती शर्मा ने कहा, “शब्दों में बयान नहीं कर सकती। नए साल पर बाबा महाकाल के दर्शन से शुरुआत हो रही है, इसलिए यह वर्ष हमारे लिए शुभ रहेगा। भस्म आरती में दर्शन करना हमारा सौभाग्य है।”
मंदिर के पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल की असीम आस्था लेकर आए हैं। अपने जीवन के पावन प्रारंभ के लिए लोग भगवान के दरबार में आना चाहते हैं। भोलेनाथ भक्तों का कल्याण सदैव करते हैं और आज यही आस्था देखने को मिल रही है।
प्रशासन और मंदिर समिति लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं ताकि दर्शन सुचारू और सुरक्षित हों और श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।




