कनाडा में रहने वाले पति ने कूरियर से भेजा ट्रिपल तलाक, ससुरालवालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप; नाशिक में दर्ज हुआ पाँचवाँ मामला

नाशिक ( शिखर दर्शन ) // महाराष्ट्र के नाशिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विवाहित महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग, मानसिक प्रताड़ना और अवैध तरीके से ट्रिपल तलाक भेजने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का निकाह जनवरी 2022 में ऐसे व्यक्ति से हुआ था, जिसके माता-पिता बिहार में रहते हैं, जबकि पति कनाडा में नौकरी करता है।
ढाई–तीन साल से चल रहा था उत्पीड़न
शुरुआती कुछ महीनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां बदल गईं। महिला की शिकायत के अनुसार, पति और सास-ससुर ने मायके से व्यवसाय के लिए पैसे लाने का दबाव बनाना शुरू किया। पिछले साढ़े तीन वर्षों में पैसे न देने पर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उसके पास मौजूद करीब आठ तोले सोने के गहने भी जबरन छीन लिए गए।
कूरियर से भेजा ट्रिपल तलाक
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पति ने महिला को कूरियर के माध्यम से एक पत्र भेजा, जिसमें ‘सुन्नत तरीके’ से तीन तलाक दिए जाने की बात लिखी थी। पत्र में पति ने साफ तौर पर तीन बार तलाक देने का जिक्र करते हुए लिखा—
“मैंने जुबान से भी तलाक दिया है और लिखित भी दे रहा हूं।”
हालांकि भारत में ट्रिपल तलाक पूरी तरह अवैध है और इसे मान्यता नहीं है।
ट्रिपल तलाक भारत में अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में तत्काल तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद 2019 में लागू हुए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत ट्रिपल तलाक को आपराधिक अपराध माना गया है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
मानसिक तनाव से गुज़र रही महिला मुंबईनाका पुलिस स्टेशन पहुंची और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। महिला सुरक्षा शाखा की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नाशिक में बढ़ रहे ऐसे मामले
नाशिक में यह कोई पहला मामला नहीं है। शहर में ट्रिपल तलाक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।
- सितंबर 2023 में पहला मामला दर्ज हुआ था।
- अप्रैल 2025 में दूसरा।
- अगस्त 2025 में तीसरा।
- 29 नवंबर 2025 को चौथा मामला सामने आया।
अब नया मामला सामने आने के बाद मुस्लिम समुदाय में महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और कानूनी जागरूकता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।



