40 साल के संघर्ष के बावजूद मंच से दूर! अयोध्या निमंत्रण न मिलने पर बिलासपुर में प्रवीण तोगड़िया ने व्यक्त की पीड़ा
विशेष संवाददाता रिपोर्ट:
बिलासपुर (शिखर दर्शन) // अयोध्या में भगवा झंडा फहराने के ऐतिहासिक अवसर पर आम जनता के उत्साह के बीच विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया की मन में हल्की सी खामोशी भी दिखाई दी। 40 वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में रहने के बावजूद उन्हें इस कार्यक्रम में निमंत्रण नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने नए देशव्यापी धार्मिक-संगठन अभियान की घोषणा कर मैदान में सक्रियता दिखा दी।
डॉ. तोगड़िया ने बताया कि वह देशभर में भ्रमण पर रहेंगे और 1 लाख स्थानों पर 3 करोड़ हनुमान चालीसा वेलनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उनका कहना था कि इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं की सहायता, सेवा और सुरक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान गुमनामी का नहीं, बल्कि संगठन और सामूहिकता को मजबूत करने का नया चरण है।
अयोध्या में निमंत्रण न मिलने के सवाल पर तोगड़िया ने कहा, “40 साल तक मैं अयोध्या में लोगों को बुलाता रहा, आज झंडा फहराया गया, लेकिन मुझे निमंत्रण नहीं दिया गया। फिर भी मुझे खुशी है कि रामलला का धाम पूरा आकार ले चुका है।”
उन्होंने हिंदुओं की सुरक्षा पर भी कड़ा रुख अपनाया और चेतावनी दी कि गांव-गांव में हनुमान चालीसा केंद्र स्थापित करने से सुरक्षा व्यवस्था और सामूहिक शक्ति मजबूत होगी। धर्मांतरण पर उन्होंने कहा कि यह समस्या गंभीर है और हनुमान चालीसा केंद्र इसके रोकथाम में मदद करेंगे।
राजनीति और हिंदुत्व के संबंध पर तोगड़िया ने कहा कि हिंदुत्व का राजनीति में इस्तेमाल जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है। बाबरी मस्जिद के मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने भारत में हुमायूं की औलादों को खत्म किया और बाबरी को मिट्टी में मिला दिया। भारत में हिंदुओं का वर्चस्व चाहिए।”
प्रेसवार्ता के दौरान तोगड़िया ने सवाल-जवाब में कई बार अपनी भावनाओं को जाहिर किया—कभी मुस्कान, कभी तीखी टिप्पणियाँ, और कभी भीतर दबे दर्द की झलक। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मंच से दूरी उन्हें कमजोर नहीं कर सकती, बल्कि उनका नया अभियान उनकी सक्रियता और प्रभाव की पुष्टि है।
इस प्रेसवार्ता ने यह संदेश दिया कि 40 साल का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब यह नए अभियान और संगठनात्मक शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है।



