MP के छिंदवाड़ा में ‘सीमेंट कांड’! 17 लाख उड़ाकर बनाई सिर्फ छत और 15 पिलर, 1 बोरी सीमेंट का बिल ₹1.92 लाख
छिंदवाड़ा ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से ग्राम पंचायत स्तर पर करोड़ों के बड़े घोटालों की याद दिलाने वाला हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जुन्नारदेव विकासखंड की विशाला ग्राम पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर सीमेंट की एक-एक बोरी की कीमत लाखों में दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड बिलों में एक बोरी सीमेंट की कीमत 1 लाख 92 हजार रुपए, 1 लाख 12 हजार रुपए, और 4 लाख 96 हजार रुपए में 3 बोरी तक दर्शाई गई है।
24 लाख की लागत, 17 लाख खर्च… फिर भी सिर्फ छत और 15 पिलर!
सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार सामुदायिक भवन के निर्माण की स्वीकृत लागत 24 लाख रुपए है। इसमें से लगभग 17 लाख रुपए खर्च भी कर दिए गए हैं, लेकिन मौके पर केवल 15 पिलर और छत का एक हिस्सा ही बना है। भवन के लिए कोई मंजूरशुदा नक्शा तक मौजूद नहीं है।
सीमेंट का बिल लाखों में! पंचायत दर्पण पर ब्लर बिलों से बढ़ा शक
पंचायत दर्पण पर अपलोड किए गए बिल ब्लर हैं, लेकिन उनमें राशि लाखों में दर्ज है।
- एक बोरी सीमेंट – ₹1,92,000
- दूसरी बोरी – ₹1,92,000
- तीसरी बोरी – ₹1,12,000
यह सभी तीन बिल 1 दिसंबर 2023 को अपलोड किए गए हैं। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक रूप से इतनी मात्रा में सीमेंट खरीदी ही नहीं गई।
सरपंच बोले– 250 बैग सीमेंट खरीदी है, बिल में और भी कुछ होगा
जब सरपंच शंकर कुमरे से इस अनियमितता पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लगभग 250 बोरी सीमेंट खरीदी गई है, और बिल में “कुछ और भी शामिल” हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे बिल की दोबारा जांच करवाकर जानकारी देंगे।
निर्माण कार्य विधायक निधि से स्वीकृत है और जनपद पंचायत इसकी नोडल एजेंसी है।
सामुदायिक भवन की जगह मंदिर निर्माण की शिकायत!
ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत दी है कि सामुदायिक भवन की जगह मंदिर निर्माण किया जा रहा है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।
पूरी रकम रिकवरी की तैयारी
जांच में घोटाला प्रमाणित होने पर
- जिम्मेदार अधिकारियों
- जनपद और ग्राम पंचायत के कर्मचारियों
से पूरी राशि की वसूली की जाएगी।
छिंदवाड़ा का यह मामला पंचायती स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन गया है, जिसमें सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल ही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आए हैं।



