राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में भरी उड़ान, अंबाला एयरबेस से दी शक्ति और आत्मनिर्भरता का संदेश

हरियाणा (शिखर दर्शन) // राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार सुबह देश की रक्षात्मक शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी। वह सुबह 9:15 बजे विशेष विमान से हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं, जहां एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने फ्लाइट सूट पहनकर राफेल में सवार होने से पहले हाथ हिलाकर अभिवादन किया। टेक ऑफ के समय पूरा वायुसेना स्टेशन देश की सर्वोच्च कमांडर की इस ऐतिहासिक उड़ान का साक्षी बना।
एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और जवानों से मुलाकात की। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्टेशन की यूनिट्स का भी दौरा किया और अधिकारियों से देश की हवाई सुरक्षा क्षमता की जानकारी ली।
राष्ट्रपति का अंबाला एयरबेस से उड़ान भरना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही बेस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभा चुका है। यहां राफेल की 17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) तैनात है, जो इन लड़ाकू विमानों के पहले बैच को संचालित करती है।
पहले भी सुखोई-30 एमकेआई में भर चुकी हैं उड़ान
राष्ट्रपति मुर्मू ने इससे पहले 7 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट में उड़ान भरी थी। उस समय उन्होंने लगभग 30 मिनट की उड़ान में ब्रह्मपुत्र नदी और तेजपुर वैली के ऊपर से उड़ान भरी थी। इस दौरान विमान ने समुद्र तल से करीब दो किलोमीटर की ऊंचाई और 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी थी।
वह सुखोई में उड़ान भरने वाली देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनी थीं। उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने भी भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इतिहास रचा था।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह राफेल उड़ान न केवल वायुसेना के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त संदेश देती है।



