बिलासपुर संभाग

न्यू लोको कॉलोनी में छठ पूजा का भव्य आयोजन: 1100 दीपों से सजी गंगा आरती, खरना पर व्रतियों ने की सूर्य उपासना की शुरुआत

श्री त्रिपुर सुंदरी मरी माई मंदिर प्रांगण में श्रद्धा और आस्था का संगम, संरक्षक प्रवीण झा और वरिष्ठ नेता राजेंद्र शुक्ला रहे मुख्य अतिथि

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) //
न्यू लोको कॉलोनी स्थित श्री त्रिपुर सुंदरी मरी माई मंदिर प्रांगण के तालाब किनारे छठ पूजा समिति द्वारा श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत भव्य आयोजन किया गया। छठ पर्व के दूसरे दिन “खरना” के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। मंदिर परिसर में गंगा आरती के दौरान 1,100 दीप प्रज्वलित कर वातावरण को प्रकाश और भक्ति से आलोकित किया गया।

कार्यक्रम में मारी माई छठ पूजा समिति के संरक्षक एवं समाजसेवी प्रवीण झा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने मां गंगा की भव्य आरती की और उपस्थित व्रतियों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं। समिति के अध्यक्ष रवि पासवान, उपाध्यक्ष केशव झा, द्रोण सोनकलिहारी, सुनील पांडेय, सोमनाथ पांडेय सहित सभी सदस्यों ने आयोजन की सफलता में विशेष भूमिका निभाई।


खरना: निर्जला व्रत और सूर्य उपासना का आरंभ

चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन मनाया जाने वाला “खरना” धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रती दिनभर शुद्ध आहार लेने के बाद शाम को गुड़ की खीर, रोटी और अन्य प्रसाद तैयार करते हैं, जिसे सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात व्रती प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ करते हैं, जो अगले दिन के “संध्या अर्घ्य” तक चलता है।

इस परंपरा के पीछे श्रद्धा और आत्मसंयम का संदेश निहित है। व्रती सूर्य देव और छठी मैया के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और अपने परिवार, समाज तथा प्रकृति के कल्याण की कामना करते हैं।


छठ पूजा की परंपरा और आध्यात्मिक महत्व

छठ पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़े उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया जाता है।
इसकी चार प्रमुख क्रियाएँ होती हैं:

  1. नहाय-खाय – पवित्र स्नान और सात्विक आहार से व्रत का आरंभ।
  2. खरना – निर्जला व्रत और प्रसाद अर्पण।
  3. संध्या अर्ग – डूबते सूर्य को अर्घ्य।
  4. उषा अर्ग – उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन।

यह पर्व शुद्धता, अनुशासन, पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक माना जाता है। प्रसाद जैसे “थे कुआ”, चावल के लड्डू, गुड़-खीर आदि पारंपरिक रूप से बिना प्याज-लहसुन और शुद्ध सामग्री से बनाए जाते हैं।


स्थानीय आयोजन में भक्ति और सामाजिक एकता की झलक

न्यू लोको कॉलोनी स्थित मरी माई मंदिर के तालाब किनारे हुए इस आयोजन में श्रद्धा और सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला , जिससे वातावरण “जय गंगे माता” के जयघोष से गूंज उठा। समिति के सभी सदस्यों ने मिलकर कार्यक्रम की व्यवस्था, दीप प्रज्वलन, जल-सज्जा और भक्तों की सुविधा में सराहनीय योगदान दिया।


निष्कर्ष

छठ पूजा जैसा पर्व समाज में संयम, सहयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को जीवंत रखता है। न्यू लोको कॉलोनी का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा बल्कि सामुदायिक सौहार्द और परंपरा के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण भी बना।
आगामी संध्या अर्ग और उषा अर्ग के अवसर पर भी श्रद्धा और भक्ति की यही पवित्र भावना बनी रहे — यही कामना की जाती है।


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