मुरैना से महंत धीरेंद्र शास्त्री का देशभर के हिंदुओं को संदेश: “जात-पात भूलो, संस्कार देकर हिंदू राष्ट्र बनाओ”

धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई कर्मचारियों से कराई हनुमान जी की आरती, 7 नवंबर से शुरू होगी हिंदू एकता पदयात्रा, चेताया–एक न हुए तो कश्मीर जैसी स्थिति, सपने में तपस्वी बाबा की फटकार के बाद वीआईपी कल्चर बंद किया
मुरैना ( शिखर दर्शन ) // बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को जौरा पहुंचे और कृषि मंडी परिसर में आयोजित आशीर्वचन कार्यक्रम में देशभर के हिंदुओं को एक अनूठा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वे केवल प्रवचन सुनाने नहीं आए, बल्कि सीधे हिंदुओं को चेतावनी और मार्गदर्शन देने आए हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने हनुमान जी की आरती से की, जिसे जौरा नगर पालिका के 13 सफाई कर्मचारियों (वाल्मीकि समाज) ने संयुक्त रूप से निभाया। इसके बाद महंत धीरेंद्र शास्त्री ने आशीर्वचन में कहा, “वर्तमान में हिंदुओं की हालत चिंताजनक है। कहीं जात-पात के नाम पर लड़ाई है, कहीं क्षेत्रवाद के कारण कलह। यदि अब जागरूक नहीं हुए, तो परिवार और बच्चों का भविष्य खतरे में है। अपने बच्चों को सिर्फ कार-व्यापार नहीं, बल्कि संस्कार देकर भेजो, ताकि धर्म विरोधी उनका धर्मांतरण न कर सकें।”
उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ को ही धर्म मान लेना गलत है। धर्म का वास्तविक अर्थ है—दीन, दुखी, भूखे, जरूरतमंद की सहायता करना और अधर्म के खिलाफ आवाज उठाना। महंत ने यह भी कहा कि मृतकों के परिवार अक्सर केवल शोक संदेश भेजते हैं, लेकिन असली स्वर्ग उन्हीं को मिलता है, जिनके वंश में संत, धर्म रक्षक और सपूत पैदा होते हैं।
महंत धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में बढ़ते धार्मिक संघर्ष और अपमान की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “तमिलनाडु में भगवान राम के पोस्टर जलाए गए, लेकिन देश में किसी को तकलीफ नहीं हुई। ऐसे लोग रावण के वंशज हैं और इन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए। हमें सरकार के कागजों में हिंदू राष्ट्र नहीं चाहिए, बल्कि हर हिंदू के दिल में हिंदू राष्ट्र की भावना होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सात नवंबर से दिल्ली के कात्यायनी माता मंदिर से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा शुरू होगी। यह 10 दिन की पदयात्रा 16 नवंबर को वृंदावन में संपन्न होगी, जिसमें गांव-गांव और गली-गली में बंटे हिंदुओं को एकजुट किया जाएगा। 16 नवंबर को बांके बिहारी को विशेष वस्त्र अर्पित किए जाएंगे।
महंत ने वीआईपी कल्चर पर भी टिप्पणी की और कहा कि अब केवल भक्तों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र की स्थापना के बाद गाय माता राष्ट्र माता के रूप में सम्मानित होंगी, रामचरित्र मानस और गीता जैसे ग्रंथों का अपमान नहीं होगा, तीर्थ और रामायण का अपमान नहीं होने देंगे, और गौ अभ्यारण्य स्थापित किया जाएगा।
महंत ने अपने संदेश के अंत में कहा, “हमने कभी भी किसी मुसलमान बेटी के खिलाफ नहीं कहा। हमने केवल कहा है—बेटी तू दुर्गा बन, काली बन, पर कभी बुर्के वाली न बन।”



