4 अक्टूबर महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकालेश्वर को अर्पित हुआ चंद्र, भव्य आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार — घर बैठे करें दर्शन

उज्जैन (शिखर दर्शन) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर शनिवार तड़के अलौकिक भस्म आरती का आयोजन भव्यता और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार प्रारंभ हुआ। पुजारियों ने सबसे पहले मंदिर परिसर के समस्त देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से महाभिषेक संपन्न हुआ।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान का रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से अलंकरण किया गया। श्रृंगार के बाद महाकाल का स्वरूप अद्वितीय और दिव्य प्रतीत हो रहा था।
अलसुबह की इस पवित्र भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित हुए और उन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं फुसफुसाकर आशीर्वाद मांगा। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय जय श्री महाकाल”, “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्ति और अध्यात्म से ओतप्रोत यह आरती दृश्य सभी भक्तों के लिए अविस्मरणीय बन गया।



