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नवरात्रि के पावन अवसर पर पीएम मोदी का उपवास – साधना, अनुशासन और आत्म-अनुभूति का अद्भुत अनुभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवरात्रि के पूरे 9 दिन उपवास रखते हैं, लेकिन यह केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि उनके लिए मन और आत्मा की गहन साधना का माध्यम है। अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ विशेष साक्षात्कार में पीएम मोदी ने उपवास के पीछे की वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत समझ साझा की।

पीएम मोदी ने बताया कि उपवास सिर्फ शरीर को नियंत्रित करने की क्रिया नहीं है। यह एक अनुशासन, समर्पण और आंतरिक अनुभव की प्रक्रिया है। नवरात्रि के दौरान वे 9 दिन तक एक ही फल का सेवन करते हैं और दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं। यह अभ्यास वे 50-55 वर्षों से लगातार कर रहे हैं।

व्रत की तैयारी और विशेषताएँ
पीएम मोदी ने कहा कि वे उपवास शुरू करने से 5-7 दिन पहले योग, आयुर्वेदिक और पारंपरिक पद्धतियों के माध्यम से अपने शरीर को तैयार करते हैं। इस दौरान वे पर्याप्त पानी पीकर डिटॉक्सिफिकेशन करते हैं। उनका कहना है कि उपवास का उद्देश्य बाहरी गतिविधियों को प्रभावित किए बिना मन और आत्मा को संवारना है।

पहला उपवास और जीवन परिवर्तन
प्रधानमंत्री ने अपने पहले उपवास का अनुभव भी साझा किया। स्कूली दिनों में गोरक्षा आंदोलन के दौरान उन्होंने सार्वजनिक स्थल पर उपवास किया, जिससे उन्हें नई चेतना और ऊर्जा मिली। उन्होंने महसूस किया कि उपवास केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि यह विज्ञान और अनुशासन का संयोजन है।

उपवास में जिम्मेदारियाँ निभाना और विदेश दौरे
पीएम मोदी ने बताया कि उपवास के दौरान भी वे प्रधानमंत्री के तौर पर सभी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं और विदेश दौरे के दौरान दूसरे नेताओं से बैठकें करते हैं। ओबामा के साथ डिनर के दौरान उन्होंने गर्म पानी पीकर उपवास जारी रखा, जिससे वहां उपस्थित लोग आश्चर्यचकित हुए।

इंद्रियों में सक्रियता और मानसिक शक्ति
पीएम मोदी के अनुसार उपवास इंद्रियों की सक्रियता बढ़ाता है। स्वाद, गंध, दृष्टि और अन्य इंद्रियां तीव्र हो जाती हैं, जिससे विचारों और निर्णयों में प्रखरता आती है। उपवास व्यक्ति को नवीन दृष्टिकोण और आउट-ऑफ-बॉक्स सोच की ओर प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह अनुभव स्पष्ट करता है कि उपवास केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासन, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा के माध्यम से संवारने का माध्यम है।


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