अवैध शराब का साम्राज्य: शराबबंदी केवल कागजों में, पुलिस संरक्षण में बिक रही बोतलें

डोंगरगढ़ की गलियों में जारी है शराब का खुला कारोबार,गलियों में बिक रही मौत की बोतलें ,महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
डोंगरगढ़ (शिखर दर्शन) // मां बमलेश्वरी की नगरी को तीर्थ स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने इसे शराबबंदी क्षेत्र घोषित किया था। लेकिन यह ऐलान महज कागजी साबित हो रहा है। शहर की गलियों और मोहल्लों में अवैध शराब की बिक्री खुलेआम जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शराबबंदी के नाम पर सरकारी दुकानें बंद होते ही शहर में अवैध शराब का कारोबार चरम पर पहुंच गया। होटल और ढाबों के बोर्ड केवल दिखावे के लिए हैं, असल में वहां से शराब की बोतलें परोसी जाती हैं। इसके अलावा कई कोचिया ऑनलाइन ऑर्डर लेकर सीधे ग्राहकों को शराब पहुंचाते हैं।

अवैध शराब के इस कारोबार में पुलिस संरक्षण का भी संदेह है। शहर के उन इलाकों में जहां हर रात शराब की बिक्री होती है, वहां पास ही पुलिस थाना है और गश्त भी नियमित है। सूत्र बताते हैं कि हर अवैध ठेके से महीने का तय हिस्सा सीधे पुलिस और विभागीय अफसरों तक पहुंचता है। इसी वजह से बड़े शराब माफिया लंबे समय से पकड़ से बाहर हैं, जबकि छोटे कोचियों पर मामूली कार्रवाई कर आंकड़ों को संतुलित दिखाया जाता है।
राजनांदगांव आबकारी विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी ने दावा किया, “पिछले छह महीनों में 200 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं और अभियान लगातार जारी है।” लेकिन स्थानीय निवासी निर्मला बाई ( बदला हुआ नाम ) कहती हैं, “हर मोहल्ले में शराब बिक रही है, बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं, महिलाओं का सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है।”

वहीं विधायक हर्षिता बघेल ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “आप ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ की बात करते हैं, लेकिन महिलाएं असल में पीड़ित हैं। 768 शासकीय दुकानें खोलने के बाद भी अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। साफ है कि पुलिस-प्रशासन संरक्षण दे रहा है और मोटी रकम वसूली कर रहा है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता बदलने के साथ विरोध करने वाली पार्टियों के धरना प्रदर्शन भी बदल गए हैं। कांग्रेस के समय भाजपा सड़क पर थी, अब भाजपा की सरकार में कांग्रेस विरोध कर रही है। लेकिन डोंगरगढ़ में अवैध शराब का कारोबार बदस्तूर जारी है।
शहर की यह सच्चाई बताती है कि शराबबंदी केवल कागजी घोषणा बनकर रह गई है। धर्मनगरी की आड़ में बोतल का कारोबार जारी है, जहां आस्था बिकती है और जिम्मेदार लोग आंख मूंदकर ‘हिस्सेदारी’ में लगे हैं।



