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नेपाल का ‘रक्त-चरित्र’: प्रदर्शनकारियों का हिंसक तांडव जारी, पूर्व सांसदों-विधायकों के घर बने निशाना, हथियारबंद भीड़ उतरी सड़कों पर, काठमांडू एयरपोर्ट बंद, भारत से सभी उड़ानें रद्द – पढ़ें ताजा हालात

नेपाल में तख्तापलट : पीएम ओली का इस्तीफा, सेना ने संभाला देश की बागडोर, 22 की मौत, हवाई उड़ानें ठप

नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। सोशल मीडिया बैन और सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया और अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। उनके इस्तीफे के बाद भी हालात शांत होने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी काठमांडू सहित कई इलाकों में हुई हिंसा और आगजनी में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।

सेना ने पूरे देश का नियंत्रण अपने हाथ में लिया

मंगलवार रात 10 बजे से नेपाल सेना ने देश का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। सेना ने कहा कि उपद्रवी तत्व हालात का फायदा उठाकर सरकारी संपत्ति और आम लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सेना ने नागरिकों से हिंसक प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील की और चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर सैनिक तैनाती और बढ़ाई जाएगी।

पूर्व प्रधानमंत्रियों और नेताओं पर हमला

प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा, झालानाथ खनाल और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के घरों को आग लगा दी। इस दौरान पूर्व पीएम झालानाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की जलकर मौत हो गई। वहीं, शेर बहादुर देउबा को घर में घुसकर पीटा गया और वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को काठमांडू में उनके घर के पास दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया।

काठमांडू एयरपोर्ट बंद, उड़ानें रद्द

हिंसक प्रदर्शनों के चलते सेना ने काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कब्जा कर लिया है। सभी हवाईअड्डों को बुधवार दोपहर तक बंद रखने का ऐलान किया गया है। रोजाना चलने वाली 250 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जिनमें एयर इंडिया, इंडिगो, नेपाल एयरलाइंस, फ्लाई दुबई और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी कंपनियां शामिल हैं।

नेपाल का भविष्य संकट में

विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति नेपाल में लोकतंत्र के बाद का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है। युवा पीढ़ी के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन न सिर्फ सरकार बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे को चुनौती दे रहा है। सेना भले ही हालात संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन नेपाल का भविष्य फिलहाल गहरे अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।


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