10 सूत्रीय मांगों पर संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का जल सत्याग्रह, प्रदेशभर में सेवाएं ठप

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने सोमवार को जल सत्याग्रह कर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों की बर्खास्तगी के विरोध में प्रदेशभर के 16,500 स्वास्थ्यकर्मी सामूहिक इस्तीफा पहले ही सौंप चुके हैं। अब जल सत्याग्रह कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। हड़ताल से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
कबीरधाम : बड़े मंदिर तालाब में जल सत्याग्रह

कबीरधाम जिले के स्वास्थ्यकर्मी बड़े मंदिर तालाब में उतरकर जल सत्याग्रह किए। उनका कहना है कि वे 23 दिनों से हड़ताल पर हैं, लेकिन शासन उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर दबाने का प्रयास कर रहा है।
बिलासपुर : अरपा नदी में उतरे कर्मचारी

बिलासपुर में आंदोलनरत स्वास्थ्यकर्मियों ने अरपा नदी में जल सत्याग्रह किया। इससे पहले रामसेतु तक विशाल रैली निकाली गई। आंदोलन के तहत बुधवार को “कलश चुनरी नियमितीकरण मनोकामना यात्रा” भी निकाली जाएगी। हड़ताल से जिला अस्पताल की ओपीडी, सर्जरी और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं।
महासमुंद : खरोरा तालाब में प्रदर्शन
महासमुंद में एनएचएम कर्मचारियों ने खरोरा तालाब में जल सत्याग्रह किया। संघ के जिला अध्यक्ष राम गोपाल खुंटे ने कहा कि वे सरकार के सामने झुकने वाले नहीं हैं। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो भविष्य में आत्मदाह और जेल भरो आंदोलन भी किया जा सकता है।

कांकेर : डांडिया तालाब में सामूहिक सत्याग्रह
कांकेर जिले में 23वें दिन भी आंदोलन जारी रहा। सैकड़ों कर्मचारी-अधिकारी मिनी स्टेडियम से रैली निकालकर डांडिया तालाब पहुंचे और जल सत्याग्रह किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
भानुप्रतापपुर : राजा तालाब में उतरे कर्मचारी
भानुप्रतापपुर में कर्मचारियों ने रैली निकालकर राजा तालाब में जल सत्याग्रह किया। उनका कहना है कि शासन उनसे पूरा काम ले रही है लेकिन वेतन और सुविधाओं में भेदभाव किया जा रहा है।
बालोद : तांदुला जलाशय में नारेबाजी
बालोद जिले के 502 एनएचएम कर्मचारियों ने तांदुला जलाशय के ओवरफ्लो क्षेत्र में बहते पानी पर बैठकर जल सत्याग्रह किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगामी चुनाव में सत्तापक्ष को सबक सिखाया जाएगा।



